भारत-चीन व्यापार पर नेपाल की आपत्ति, लिपुलेख दर्रे को लेकर बढ़ गया है तनाव.

Aanya7 August 20262 min read71 viewsIndia
भारत-चीन व्यापार पर नेपाल की आपत्ति, लिपुलेख दर्रे को लेकर बढ़ गया है तनाव.

भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे के रास्ते पारंपरिक सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने के फैसले पर नेपाल ने अपनी कड़ी नाराजगी जताई है। काठमांडू स्थित सरकार ने इस कदम को अपनी संप्रभुता के खिलाफ बताते हुए आधिकारिक तौर पर चिंता व्यक्त की है। नेपाल का स्पष्ट मानना है कि यह क्षेत्र उनका है और बिना उनकी सहमति या भागीदारी के वहां कोई भी व्यावसायिक गतिविधि करना उन्हें स्वीकार्य नहीं है।

नेपाल का क्या है आधिकारिक पक्ष

नेपाली विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए साफ कहा है कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी उनके अभिन्न अंग हैं। नेपाल सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम को अत्यंत गंभीरता से लिया है और भविष्य में इस मुद्दे को संबंधित मंचों पर उठाने का निर्णय लिया है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि पड़ोसी देशों द्वारा नेपाल की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों में अनदेखी करना उचित नहीं है।

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विवाद का पुराना इतिहास

भारत और नेपाल के बीच इस क्षेत्र को लेकर पहले भी कूटनीतिक तनाव देखा गया है। वर्ष 2020 में जब भारत ने लिपुलेख को जोड़ने वाली सड़क का उद्घाटन किया था, तब दोनों देशों के रिश्तों में काफी खटास आ गई थी। उस समय नेपाल ने अपना नया राजनीतिक और प्रशासनिक नक्शा जारी कर दिया था, जिसमें विवादित इलाकों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। तब से ही यह मुद्दा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

व्यापार की स्थिति और पृष्ठभूमि

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लिपुलेख के जरिए भारत और चीन के बीच व्यापार का सिलसिला 1992 से जारी है। हालांकि, कोविड-19 महामारी के कारण 2020 में इस व्यापारिक मार्ग को बंद कर दिया गया था। भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब इस मार्ग को फिर से बहाल करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। दोनों देशों ने 1 जून से व्यापार फिर से शुरू करने पर सहमति बनाई थी, लेकिन प्रशासनिक तैयारी और बुनियादी ढांचे की कमी के चलते इसमें देरी हुई थी।

दूसरी ओर, भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। भारत का कहना है कि लिपुलेख उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का हिस्सा है और यह पूर्ण रूप से भारतीय क्षेत्र है। भारत और चीन के बीच व्यापारिक गतिविधियों को इसी के तहत फिर से सुचारू किया जा रहा है। नेपाल सरकार ने इन सभी पहलुओं पर हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज कराई है, जिससे आने वाले समय में कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की संभावना बढ़ गई है।

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