Lipulekh Pass: भारत और चीन के व्यापार पर नेपाल ने जताई कड़ी आपत्ति, कहा हमारी सहमति बिना कुछ मंजूर नहीं

भारत और चीन के बीच पारंपरिक सीमा व्यापार एक बार फिर शुरू होने पर नेपाल सरकार ने अपनी गहरी चिंता और आपत्ति दर्ज की है। नेपाल का साफ कहना है कि उसकी अनुमति या भागीदारी के बिना इस तरह से व्यापार शुरू करना उसे बिल्कुल स्वीकार नहीं है क्योंकि यह मामला उसकी संप्रभुता से जुड़ा हुआ है। नेपाली विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में एक आधिकारिक बयान जारी किया है जिसमें इस पूरे घटनाक्रम पर नाराजगी जताई गई है।
भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे से व्यापार शुरू
भारत और चीन ने आपसी सहमति से लिपुलेख दर्रे के रास्ते पारंपरिक सीमा व्यापार को औपचारिक रूप से फिर से चालू कर दिया है। यह व्यापार मार्ग कोविड-19 महामारी के कारण साल 2020 से पूरी तरह से बंद पड़ा था। दोनों देशों ने इस रास्ते से 1 जून से व्यापार शुरू करने की सहमति जताई थी, लेकिन जरूरी बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक तैयारियों की कमी के कारण यह तब शुरू नहीं हो पाया था। अब जाकर इस मार्ग से दोबारा आवाजाही और व्यापारिक गतिविधियां शुरू हुई हैं। जानकारी के अनुसार, भारत और चीन के बीच लिपुलेख के रास्ते सीमा व्यापार साल 1992 से लगातार चल रहा था। भारतीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक महामारी के बाद अब इसे फिर से पटरी पर लाया गया है। दूसरी तरफ, भारत का यह स्पष्ट रुख रहा है कि लिपुलेख उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के अंतर्गत उसका अपना पूरी तरह से वैध क्षेत्र है।
नेपाल का पुराना दावा और संप्रभुता का सवाल
नेपाल सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि लिपुलेख क्षेत्र उसका अपना संप्रभु भूभाग है। नेपाली विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में साफ कहा गया है कि नेपाल की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मामलों में नेपाल को शामिल किए बिना लिया गया कोई भी निर्णय किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा। नेपाल लगातार यह दोहराता रहा है कि लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी क्षेत्र नेपाल के अभिन्न अंग हैं। नेपाल सरकार ने इस पूरे मुद्दे को बेहद गंभीरता से लिया है और मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि सरकार अपने कूटनीतिक माध्यमों से संबंधित सभी मंचों पर इस मामले को प्रमुखता से उठाएगी।
पहले भी हो चुका है कड़ा विरोध
भारत और नेपाल के बीच इस भूभाग को लेकर पहले भी कूटनीतिक तनाव देखा जा चुका है। साल 2020 में जब भारत ने लिपुलेख को जोड़ने वाली एक नई सड़क का उद्घाटन किया था, तब नेपाल और भारत के संबंधों में काफी कड़वाहट आ गई थी। उसी साल नेपाल सरकार ने एक नया राजनीतिक और प्रशासनिक नक्शा भी जारी किया था जिसमें विवादित क्षेत्रों यानी लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को नेपाल के अंदर दिखाया गया था। अब एक बार फिर से इस रास्ते पर व्यापारिक गतिविधियां शुरू होने से नेपाल ने अपनी पुरानी आपत्तियों को दोहराया है और इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इस पूरे मामले को लेकर आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है ताकि सीमा से जुड़े इन संवेदनशील मुद्दों का कोई समाधान निकाला जा सके।