नेपाल की संसद में नया नियम लागू, अब सदन के अंदर काला चश्मा पहनने पर लगी रोक.

नेपाल की राजनीति और संसद से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ अब सदन के अंदर नेताओं और मंत्रियों के पहनावे को लेकर सख्त नियम बना दिए गए हैं। नेपाल की संसद में पिछले कुछ समय से सांसदों के कपड़ों और खासतौर पर काले चश्मे को पहनने को लेकर लगातार बहस चल रही थी जो अब एक औपचारिक निर्देश में बदल चुकी है। प्रतिनिधिसभा के स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल ने प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह, गृहमंत्री सुधन गुरूंग, भौतिक पूर्वाधार मंत्री सुनिल लम्साल और अन्य सभी सांसदों से साफ शब्दों में कह दिया है कि वे अब संसद की बैठकों के दौरान काला चश्मा पहनकर बिल्कुल नहीं आएंगे और तय किए गए ड्रेस कोड का पूरी सख्ती के साथ पालन करेंगे।
संसदीय गरिमा और मर्यादा बचाने के लिए उठाया गया कदम
हाल के दिनों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के कई चुने हुए सांसद और मंत्री लगातार संसद की बैठकों में काला चश्मा लगाकर पहुंच रहे थे जिसपर विपक्षी दलों के नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई थी। विपक्षी सांसदों का साफ कहना था कि इस तरह का पहनावा संसद की गरिमा और उसकी पुरानी मर्यादा के बिल्कुल खिलाफ है। स्पीकर के निजी सचिव नवराज पाण्डे की तरफ से जारी किए गए नए निर्देशों में यह बात स्पष्ट कर दी गई है कि सभी सांसद केवल निर्धारित पोशाक ही पहनकर आएं और अपनी छाती पर सांसद का आधिकारिक लोगो भी जरूर लगाएं लेकिन सदन के अंदर किसी भी हाल में काला चश्मा लगाकर बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह पूरा फैसला देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद का अनुशासन और उसकी गरिमा को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
बुधवार की बैठक में ड्रेस कोड और आचरण पर हुई लंबी चर्चा
बीते बुधवार को संसद की कार्यव्यवस्था परामर्श समिति की एक अहम बैठक बुलाई गई जिसमें सभी सांसदों के अनुशासन, सदन में उनकी उपस्थिति, पहनने वाले कपड़ों और संसदीय आचरण को लेकर बहुत विस्तार से बातचीत की गई। इस बैठक के दौरान स्पीकर ने सभी अलग-अलग राजनीतिक दलों के मुख्य सचेतकों और सचेतकों को यह जिम्मेदारी सौंपी कि वे अपने-अपने दलों के नेताओं से इस नए ड्रेस कोड का कड़ाई से पालन कराना सुनिश्चित करें। इसी चर्चा के बीच नेपाली कांग्रेस की सांसद वासना थापा ने एक बड़ा सवाल उठाते हुए पूछा कि जब देश के प्रधानमंत्री खुद सदन के अंदर काला चश्मा पहनकर आते हैं, तो फिर आम नियमों का पालन कैसे ठीक से सुनिश्चित किया जा सकेगा। इस सवाल के जवाब में सभापति ने साफ किया कि प्रधानमंत्री भी किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं और उनके दल के मुख्य सचेतक को पूरा अधिकार है कि वे उन्हें जरूरी निर्देश दें।
किसी भी तरह की ढिलाई या बहानेबाजी नहीं होगी बर्दाश्त
बैठक में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की सचेतक क्रान्तिशिखा धिताल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि संसद में सभी के लिए कोट पहनना और आधिकारिक लोगो लगाना अनिवार्य कर देना चाहिए। इसके समर्थन में यह उदाहरण भी दिया गया कि देश के राष्ट्रपति के सदन में आने वाले दिनों में या फिर किसी भी अन्य विशेष समारोह के दौरान पहले से ही कड़ा ड्रेस कोड लागू होता आया है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्य सचेतक युवराज दुलाल ने जानकारी देते हुए बताया कि स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल ने बहुत ही कड़े शब्दों में यह ऐलान कर दिया है कि अब से ड्रेस कोड, आधिकारिक लोगो और संसदीय मर्यादा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार का कोई बहाना या एक्सक्यूज स्वीकार नहीं किया जाएगा और बनाए गए ये नए नियम सदन के हर एक सदस्य के लिए पूरी तरह से एक समान रूप से लागू होंगे।
सत्तारूढ़ दल की होगी पूरी जिम्मेदारी
चर्चा के दौरान सदन के कई अन्य सदस्यों ने भी यह जानने की कोशिश की कि अगर प्रधानमंत्री खुद ही काले चश्मे का इस्तेमाल करते हुए सदन में प्रवेश करते हैं, तो उस स्थिति में क्या कार्रवाई की जाएगी। इसके जवाब में स्पीकर ने दोहराया कि प्रधानमंत्री और अन्य मंत्रियों को तय नियमों के मुताबिक ही सदन के अंदर लेकर आना सत्तारूढ़ दल की अपनी मुख्य जिम्मेदारी है। पिछले कुछ दिनों से नेपाल की संसद में जरूरी विधायी कामों से ज्यादा सांसदों के आपसी व्यवहार और उनके अजीब पहनावे की चर्चाएं आम हो चली थीं, जिसे देखते हुए स्पीकर का यह ताजा निर्देश संसद की संस्थागत अनुशासन व्यवस्था को फिर से मजबूत करने की एक बड़ी और ठोस कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।