नेपाल संसद में नया फरमान, अब काला चश्मा पहनकर सदन में नहीं आ सकेंगे नेता

Sushma Kumari7 August 20262 min read59 viewsWorld
नेपाल संसद में नया फरमान, अब काला चश्मा पहनकर सदन में नहीं आ सकेंगे नेता

नेपाल की संसद के अंदर अब नेताओं और मंत्रियों के लिए पहनावे को लेकर सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। प्रतिनिधिसभा के स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल ने सदन की गरिमा को बनाए रखने के लिए सभी सदस्यों को अब संसद की बैठकों में काला चश्मा न पहनने का निर्देश दिया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब संसद में सांसदों के पहनावे और उनके व्यवहार को लेकर लगातार चर्चा और बहस का माहौल बना हुआ था।

संसद में अब ड्रेस कोड का पालन अनिवार्य

स्पीकर ने साफ कर दिया है कि संसद के सभी सदस्यों को निर्धारित ड्रेस कोड का पालन करना होगा और आधिकारिक लोगो पहनकर ही सदन में बैठना होगा। इस निर्देश का पालन करने के लिए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह, गृहमंत्री सुधन गुरूंग, भौतिक पूर्वाधार मंत्री सुनिल लम्साल समेत तमाम सांसदों को हिदायत दी गई है। स्पीकर के निजी सचिव नवराज पाण्डे ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि संसद की मर्यादा को सुरक्षित रखना एक अहम प्राथमिकता है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

विपक्षी दलों ने उठाया सवाल

कार्यव्यवस्था परामर्श समिति की बैठक में अनुशासन और संसदीय आचरण पर लंबी बातचीत हुई। इस दौरान नेपाली कांग्रेस की सांसद वासना थापा ने सदन में सवाल उठाया कि अगर देश के प्रधानमंत्री ही काला चश्मा पहनकर सदन में आएंगे, तो दूसरे सांसदों से नियमों का पालन कैसे सुनिश्चित होगा। इसके जवाब में स्पीकर ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री भी किसी न किसी राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं और उनके संबंधित दल के मुख्य सचेतक को उन्हें आवश्यक निर्देश देने होंगे।

सख्ती से लागू होंगे नियम

संसद में कई दिनों से इस बात की चर्चा हो रही थी कि आरएसपी यानी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के कई सांसद और मंत्री संसद में काला चश्मा पहनकर आते रहे हैं। इसे लेकर विपक्षी सांसदों ने इसे संसदीय मर्यादा के खिलाफ बताया था। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्य सचेतक युवराज दुलाल ने बताया कि स्पीकर ने किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने की बात कही है। अब ड्रेस कोड, आधिकारिक लोगो और संसदीय शिष्टाचार के मामले में किसी भी सांसद को कोई 'एक्सक्यूज' नहीं दिया जाएगा। नियम सभी के लिए पूरी तरह समान रहेंगे।

सदन में इस बात पर भी चर्चा हुई कि अगर विशेष समारोह या राष्ट्रपति की उपस्थिति वाले दिनों की तरह सामान्य बैठकों में भी अनुशासन बनाए रखा जाए, तो संसद की कार्यप्रणाली बेहतर हो सकती है। आरएसपी की सचेतक क्रान्तिशिखा धिताल ने भी कोट और आधिकारिक लोगो को पूरी तरह अनिवार्य बनाने का समर्थन किया है। इस घटनाक्रम की अधिक जानकारी हिन्दुस्थान समाचार की रिपोर्ट के माध्यम से ली जा सकती है। अब देखना यह होगा कि स्पीकर के इस कड़े रुख के बाद भविष्य की बैठकों में संसद का नजारा कितना बदलता है।

Share:

Comments

Leave a comment