Nepal Lpg Crisis: नेपाल में गैस संकट के बीच पीएम बालेन्द्र शाह ने किया सरकार के कामकाज का बचाव, गिनाई उपलब्धियां.

नेपाल में इन दिनों लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस यानी LPG का गंभीर संकट चल रहा है, जिसके चलते आम लोगों को खाने-पीने की चीजें पकाने के लिए सिलेंडर पाने में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। इस मुश्किल हालात के बीच देश के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने अपनी सरकार के कामकाज का खुलकर बचाव किया है और जनता के सामने अपनी सरकार की तरफ से किए जा रहे कामों की पूरी जानकारी रखी है। प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक लंबा पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने देश के उन सरकारी उद्योगों और संस्थानों को फिर से शुरू करने की बात कही जो लंबे समय से घाटे में चल रहे थे या पूरी तरह बंद पड़े थे। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी सरकार की पहली प्राथमिकता राष्ट्रीय उद्योगों को ज्यादा मजबूत और उत्पादक बनाने की है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके।
सरकारी उद्योगों में सुधार का किया दावा
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने अपने बयान में देश के कई बड़े और पुराने सरकारी संस्थानों में हुए सुधारों का सिलसिलेवार जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किस तरह से बंद पड़ी कंपनियों को दोबारा पटरी पर लाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने नेपाल ड्रग्स लिमिटेड, हेटौंडा टेक्सटाइल इंडस्ट्री, नेपाल एयरलाइंस, डेयरी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DDC) और सिंहदरबार वैद्यखाना जैसे संस्थानों की हालत सुधारने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। इन सुधारों के सकारात्मक नतीजे भी अब धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं जिससे सरकार का हौसला बढ़ा है और वे आने वाले दिनों में और भी बेहतर काम करने की योजना बना रहे हैं ताकि देश के आम नागरिकों को इन सरकारी संस्थानों का सीधा फायदा मिल सके।
दवा कंपनी और एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति में सुधार
प्रधानमंत्री के मुताबिक, गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज का सर्टिफिकेट मिलने के बाद नेपाल ड्रग्स लिमिटेड ने पिछले 4 महीनों में कुल 23.8 करोड़ नेपाली रुपये मूल्य की दवाइयों की बिक्री की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष के दौरान कुल 30 करोड़ नेपाली रुपये का शानदार मुनाफा भी कमाया है। इसके अलावा, लंबे वक्त से ताले में बंद पड़ी हेटौंडा टेक्सटाइल इंडस्ट्री में अब दोबारा से ट्रायल प्रोडक्शन यानी परीक्षण उत्पादन का काम शुरू कर दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ, नेपाल एयरलाइंस ने भी पिछले वित्त वर्ष के बीच के समय में कुल 6.27 अरब नेपाली रुपये का भारी-भरकम राजस्व अर्जित किया है, जो देश की विमानन सेवा के लिए एक अच्छी खबर मानी जा रही है।
डेयरी विकास निगम को लेकर दी राहत भरी जानकारी
आम लोगों और किसानों से जुड़े संस्थान डेयरी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DDC) के कामकाज को लेकर भी प्रधानमंत्री ने बड़ी बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि सरकार ने किसानों को दिए जाने वाले पुराने बकाया भुगतान को काफी हद तक कम कर दिया है। पहले किसानों का बकाया पैसा 72 करोड़ रुपये था, जिसे घटाकर अब केवल 35 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा इस संस्थान की रोज की कमाई यानी दैनिक आय भी करीब 60 लाख रुपये से बढ़कर अब सीधे 90 लाख रुपये प्रतिदिन हो गई है। किसानों को उनका पैसा मिलने से ग्रामीण इलाकों के लोगों को काफी राहत मिली है और वे इस कदम की सराहना भी कर रहे हैं क्योंकि खेती-किसानी से जुड़े लोगों के लिए समय पर भुगतान मिलना बहुत जरूरी होता है।
गैस संकट पर सीधा जवाब देने से बचे प्रधानमंत्री
एक तरफ जहां प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने अपनी सरकार की इन तमाम उपलब्धियों को बहुत जोर-शोर से गिनाया, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने देश में हाल ही में पैदा हुए गंभीर LPG गैस संकट पर सीधे तौर पर कोई भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया। मौजूदा समय में गैस की भारी किल्लत के कारण देश के आम उपभोक्ताओं को अपने घरों में खाना पकाने के लिए गैस सिलेंडर हासिल करने में बेहद कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लोग सुबह से लेकर शाम तक गैस के लिए लाइनों में खड़े रहने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है। प्रधानमंत्री की तरफ से इस गंभीर मुद्दे पर सीधा बयान न आने के कारण आम जनता में थोड़ी मायूस और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
संसद में भी उठ चुके हैं तीखे सवाल
प्रधानमंत्री का यह सफाई भरा बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देश की प्रतिनिधि सभा में खुद सत्तारूढ़ दल के सांसदों समेत कई अन्य दलों के सांसदों ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया है। संसद के सत्र के दौरान कई सांसदों ने देश में एलपीजी गैस की भारी कमी और सरकार के कुल मिलाकर अब तक के कामकाज के प्रदर्शन को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं। सांसदों का कहना है कि आम जनता महंगाई और रसोई गैस जैसी बुनियादी जरूरतों के संकट से जूझ रही है, और सरकार को इन समस्याओं का तुरंत कोई ठोस समाधान निकालना चाहिए। अब देखना यह होगा कि सरकार इस गैस संकट से निपटने के लिए आने वाले दिनों में क्या नए कदम उठाती है और जनता को इस परेशानी से कब तक पूरी तरह से राहत मिल पाती है।