Pokhara में प्रदर्शन, नेपाली युवाओं ने भारतीय सेना में गोरखा रेजीमेंट की भर्ती फिर से शुरू करने की उठाई मांग.

भारतीय सेना की गोरखा रेजीमेंट में नेपाली युवाओं की भर्ती को दोबारा शुरू कराने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। नेपाल के पोखरा शहर में बुधवार को सैकड़ों पूर्व सैनिकों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती लंबे समय से बंद होने के कारण लाखों युवाओं के सामने रोजगार का बड़ा संकट पैदा हो गया है और उन्हें मजबूरी में खाड़ी देशों का रुख करना पड़ रहा है।
पोखरा में निकला बड़ा मार्च और सौंपा गया ज्ञापन
भारतीय भूतपूर्व सैनिक गोर्खा ब्रिगेड नेपाल के नेतृत्व में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया था। पोखरा के अलग-अलग इलाकों से होते हुए यह मार्च जिला प्रशासन कार्यालय कास्की तक पहुंचा। वहां प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख जिला अधिकारी कुमारसिंह गुरुङ के जरिए सरकार को दो सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह और गृहमंत्री सुधन गुरुङ से अपील की गई है कि वे भारत सरकार के साथ तुरंत बातचीत शुरू करें। ब्रिगेड के अध्यक्ष कर्नल कृष्णबहादुर खत्री के हस्ताक्षर वाले इस ज्ञापन में पूर्व सैनिकों से जुड़े संघ-संस्थाओं के नवीकरण की प्रक्रिया को भी जल्द से जल्द सुचारु करने की मांग की गई है।
211 साल पुरानी परंपरा और अग्निपथ योजना का असर
इतिहास के पन्नों को पलटें तो साल 1814 से 1816 के बीच नेपाल-अंग्रेज युद्ध और सुगौली संधि के बाद तत्कालीन ब्रिटिश इंडिया सरकार ने नेपाली गोरखाओं को सेना में शामिल करने की शुरुआत की थी। यह परंपरा भारत की आजादी के बाद भी बिना रुके लगातार चलती रही और गोरखा सैनिकों की भर्ती का यह इतिहास करीब 211 वर्ष पुराना हो चुका है। हालांकि, भारत सरकार द्वारा 14 जून 2022 से देश में 'अग्निपथ' योजना लागू किए जाने के बाद नेपाल सरकार ने विभिन्न कारणों का हवाला देकर भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती पर रोक लगा दी थी।
अग्निवीर योजना से जुड़ी अहम बातें और कमाई का गणित
कर्नल कृष्णबहादुर के मुताबिक, अग्निपथ योजना के तहत 17.5 से 21 वर्ष की उम्र के युवाओं को 'अग्निवीर' के रूप में चुना जाता है। नियम के अनुसार चार साल की सेवा पूरी होने के बाद इनमें से सिर्फ 25 प्रतिशत युवाओं को ही पक्की नौकरी में रखा जाएगा। बाकी बचे 75 प्रतिशत अग्निवीरों को सेवा से मुक्त करते समय करीब 18 लाख 71 हजार रुपये की एकमुश्त राशि दी जाएगी। इसके अलावा उन्हें अर्धसैनिक बलों और बड़ी कंपनियों में काम पाने के लिए प्राथमिकता देने का भी प्रावधान तय किया गया है।
कर्नल खत्री ने बताया कि इन चार सालों के दौरान एक युवा अपनी मेहनत से करीब 45 से 50 लाख रुपये तक की कमाई कर सकता था। यह शानदार मौका छिन जाने के कारण आज लाखों नेपाली युवा बेरोजगार बैठने को मजबूर हैं।
खाड़ी देशों में काम करने की मजबूरी
भारतीय सेना में भर्ती का दरवाजा बंद होने से नेपाली युवाओं के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थिति यह है कि अब इन युवाओं को मजबूरी में खाड़ी देशों की तरफ जाना पड़ रहा है, जहां उन्हें करीब 50 डिग्री सेल्सियस जैसी भीषण गर्मी में बेहद कम वेतन पर काम करना पड़ता है। पूर्व सैनिकों ने चिंता जताई है कि भर्ती रुकने से केवल युवाओं का भविष्य ही खराब नहीं हो रहा, बल्कि नेपाल आने वाला अरबों रुपये का रेमिटेंस और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
पूर्व गोरखा सैनिकों ने नेपाल सरकार को सलाह दी है कि चूंकि अग्निवीर योजना का पांच साल का परीक्षण चरण जून 2027 में पूरा होने वाला है, इसलिए सरकार को समय रहते भारत सरकार के साथ संवाद और उच्च स्तरीय बातचीत शुरू कर देनी चाहिए ताकि युवाओं के लिए फिर से रास्ते खुल सकें।