Nepal Import Tax: नेपाल में भारत से आने वाले सामान पर लगा टैक्स, 100 रुपये से ऊपर की चीज़ों पर अब देना होगा शुल्क, बिरगंज में भड़का गुस्सा

नेपाल के बिरगंज शहर में भारत से आने वाले सामानों पर टैक्स लगाने के सरकारी फैसले के खिलाफ भारी विरोध हो रहा है. सरकार ने अब 100 नेपाली रुपये से ज़्यादा कीमत वाले हर सामान पर टैक्स वसूलना शुरू कर दिया है. इस फैसले से आम लोगों और छोटे व्यापारियों में काफी गुस्सा है क्योंकि उनकी रोज़मर्रा की ज़रूरतें और रीति-रिवाज भारत से आने वाले सामानों पर निर्भर हैं.

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नया नियम क्या है और कितना देना होगा टैक्स?

नेपाल सरकार ने सीमा शुल्क (Customs Duty) के नियमों को बहुत सख्ती से लागू कर दिया है. अब अगर कोई व्यक्ति भारत से 100 नेपाली रुपये (NRS 100) से ज़्यादा का सामान लाता है, तो उसे टैक्स देना होगा. यह टैक्स सामान के हिसाब से 5% से लेकर 80% तक हो सकता है. यह नियम पहले भी कानून में था, लेकिन अब इसे पूरी तरह से लागू किया गया है. इसमें आम नागरिकों, सरकारी कर्मचारियों या NGO कार्यकर्ताओं के लिए कोई छूट नहीं दी गई है.

विरोध प्रदर्शन और लोगों की मांगें क्या हैं?

19 अप्रैल 2026 को बिरगंज में लोगों ने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन किया. वहीं काठमांडू में मधेसी युवाओं ने नारेबाजी करते हुए इस टैक्स को रद्द करने की मांग की. लोगों का कहना है कि 100 रुपये की सीमा आज की महंगाई के हिसाब से बहुत कम और अव्यावहारिक है. प्रदर्शनकारियों और नागरिक संगठनों ने इसे एक तरह की अनघोषित नाकाबंदी बताया है. कई सांसदों ने गृह मंत्री Sudan Gurung से मिलकर सीमा पर रहने वाले लोगों की परेशानियों को बताया और नियम बदलने की मांग की.

सरकार का तर्क और मुख्य जानकारियां

Customs Department के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम तस्करी को रोकने और सरकारी राजस्व की चोरी बचाने के लिए उठाया गया है. अधिकारियों के अनुसार, कुछ लोग आम नागरिकों के ज़रिए छोटे-छोटे टुकड़ों में सामान लाकर तस्करी करते थे, जिसे अब रोका जाएगा. इस कदम से नेपाल के स्थानीय व्यापारियों को फायदा होने की उम्मीद है. इस पूरे मामले की मुख्य जानकारियां नीचे दी गई हैं:

विवरण जानकारी
टैक्स की सीमा 100 नेपाली रुपये से अधिक का सामान
टैक्स की दर 5% से 80% तक
लागू होने का समय अप्रैल के मध्य से (बैशाख 1, 2083)
मुख्य विरोध स्थल बिरगंज और काठमांडू
मुख्य उद्देश्य तस्करी रोकना और घरेलू उत्पादों को बढ़ावा देना
प्रभावित क्षेत्र मधेस और लुम्बिनी प्रांत