नेपाल संसद में गूंजा 'सरकार कहां है' सवाल, सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने अपनी ही सरकार को घेरा

Aanya13 August 20264 min read61 viewsWorld
नेपाल संसद में गूंजा 'सरकार कहां है' सवाल, सत्तारूढ़ दल के सांसदों ने अपनी ही सरकार को घेरा

नेपाल की राजनीति में शुक्रवार को एक बड़ा और चौंकाने वाला वाकया सामने आया जब संसद के भीतर सत्तारूढ़ दल के ही सांसदों ने अपनी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। आम जनता की रोजमर्रा की समस्याओं और परेशानियों को उठाते हुए प्रतिनिधियों ने सदन में तीखे तेवर दिखाए और पूछा कि आखिर ‘सरकार कहां है?’ और लोगों की सुधि लेने वाला कोई क्यों नहीं बचा है। इस सत्र के दौरान खाना पकाने वाली गैस की भारी किल्लत, रासायनिक खाद का संकट, गरीबों के अंतिम संस्कार का खर्च और गंभीर बीमारियों के इलाज जैसे तमाम जरूरी मुद्दों पर खुलकर चर्चा की गई। सांसदों ने साफ शब्दों में कहा कि भले ही देश में नई व्यवस्था और सरकार बन गई हो, लेकिन जमीनी स्तर पर आम आदमी की जिंदगी में कोई खास बदलाव नहीं आया है और लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।

गैस की किल्लत और लंबी लाइनों पर फूटा गुस्सा

प्रतिनिधिसभा के आकस्मिक समय के दौरान बोलते हुए सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी यानी RSP की सांसद इंदिरा राना ने रसोई गैस की भारी कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार का ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा कि गैस नहीं मिलने की वजह से आम जनता बुरी तरह परेशान हो रही है और सरकार को जल्द से जल्द इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए। इसी कड़ी में आरएसपी सांसद रमेश प्रसाईं ने चुनाव के दौरान पार्टी की तरफ से दिए गए नारों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय सरकारी कार्यालयों में लंबी कतारों को खत्म करने के लिए ‘नो लाइन, ओनली ऑनलाइन’ का बड़ा वादा किया गया था, लेकिन आज की हकीकत यह है कि जनता को चावल पकाने के लिए गैस सिलेंडर पाने वास्ते दिन-रात और आधी-आधी रात तक लंबी लाइनों में खड़े रहना पड़ रहा है। उन्होंने बेहद शर्मिंदगी जताते हुए कहा कि दो-तिहाई बहुमत वाली सरकार के आने के बाद भी यदि आम नागरिक को यह दिन देखना पड़े तो यह चिंता का विषय है। इसके अलावा सांसद कमल सुवेदी ने भी बाजार में जानबूझकर कृत्रिम कमी पैदा करने और कालाबाजारी करने वाले लोगों पर तुरंत नकेल कसने की मांग की ताकि आम लोगों को सुचारू रूप से गैस मिल सके।

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अंतिम संस्कार के खर्च और गरीबों की बेबसी का मुद्दा

सत्र के दौरान आरएसपी सांसद टीका संग्रौला ने एक बेहद संवेदनशील और मानवीय मुद्दे को उठाते हुए गरीब नागरिकों के अंतिम संस्कार के खर्च पर बात की। उन्होंने सदन को बताया कि शुक्रवार की सुबह ही उनके पास एक आम नागरिक का फोन आया था जिसके पास पशुपति आर्यघाट पर अपने ही रिश्तेदार का अंतिम संस्कार करने तक के लिए पैसे नहीं थे। उस फोन कॉल ने उन्हें अंदर से झकझोर कर रख दिया। उन्होंने सरकार को आईना दिखाते हुए कहा कि एक साधारण नागरिक जीवनभर सरकार को विभिन्न रूपों में टैक्स देता है, तो कम से कम उसकी मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार सम्मानजनक और सहज तरीके से होना राज्य की नैतिक जिम्मेदारी है। सांसद ने मांग की कि देश के किसी भी गरीब या असहाय नागरिक के निधन पर कम से कम एक गट्ठर लकड़ी, शव रखने की जगह और एक माचिस की तीली तो राज्य को मुफ्त उपलब्ध करवानी ही चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल किया कि जो नागरिक जन्म लेने के बाद से ही कर चुकाता है, वह मरने के बाद चिता पर जाते समय बिना शर्त मुफ्त में धुएं में उड़ने का अधिकार क्यों नहीं रख सकता। सरकार को ऐसे समय में पीड़ित परिवार का अभिभावक बनकर उनके साथ खड़े होने की जरूरत है।

रासायनिक खाद के संकट पर भी सरकार से मांगा जवाब

किसानों की समस्याओं को सामने रखते हुए सांसद पारशमणि गेलाल ने देश में रासायनिक खाद की भारी कमी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने सरकार से दो टूक शब्दों में कहा कि यदि बाजार में वास्तव में खाद उपलब्ध नहीं है, तो संबंधित मंत्रालय को जनता और सदन के सामने यह बात साफ-साफ मान लेनी चाहिए। यदि मंत्रालय यह दावा कर रहा है कि गोदामों और बाजारों में पर्याप्त मात्रा में खाद मौजूद है, तो सांसदों को भी इसमें अपनी भूमिका निभानी चाहिए और वे स्थानीय नगरपालिकाओं के मेयरों के साथ तालमेल बिठाकर खाद को सही जगह तक पहुंचाने की पूरी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं। सत्तारूढ़ दल के सांसदों द्वारा ही इस तरह से गैस, खाद और गरीबों की बुनियादी जरूरतों पर सरकार को घेरने से अब देश की संसद में सरकारी मशीनरी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी आप हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से भी पढ़ सकते हैं, जहां इस सत्र की पूरी रिपोर्ट प्रकाशित की गई है।

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