नेपाल में सरकार पर उठे गंभीर सवाल, अपनी ही पार्टी के सांसदों ने पूछा– आखिर सरकार कहां है?

नेपाल की संसद में शुक्रवार को एक बेहद हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला, जहां सत्ताधारी दल के ही सांसदों ने अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। संसद में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के सांसदों ने एक सुर में पूछा कि आखिर आम नागरिकों की समस्याओं को हल करने वाली सरकार कहां है। यह घटनाक्रम उस समय हुआ जब देश में रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों की भारी कमी और आम आदमी की पीड़ा को लेकर सदन में चर्चा हो रही थी।
गैस और खाद की किल्लत से जनता परेशान
संसद में RSP सांसद इंदिरा राना ने रसोई गैस की भारी किल्लत का मुद्दा उठाया और सरकार को नागरिकों की परेशानी की ओर ध्यान देने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गैस न मिलने के कारण आम लोग काफी परेशान हैं और सरकार को आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। इसी तरह सांसद कमल सुवेदी ने बाजार में गैस की कृत्रिम कमी और कालाबाजारी को रोकने की मांग की। दूसरी तरफ सांसद पारशमणि गेलाल ने रासायनिक खाद की कमी पर सरकार को घेरा। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर खाद उपलब्ध नहीं है तो मंत्रालय को सच बताना चाहिए और सांसदों के साथ समन्वय करके इसे किसानों तक पहुँचाने की व्यवस्था करनी चाहिए।
'नो लाइन, ओनली ऑनलाइन' का वादा अधूरा
RSP सांसद रमेश प्रसाईं ने चुनाव के दौरान अपनी पार्टी द्वारा किए गए 'नो लाइन, ओनली ऑनलाइन' के चुनावी वादे की याद दिलाई। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आज जनता को चावल पकाने के लिए गैस सिलिंडर लेने हेतु रात-रात भर लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार के दो-तिहाई बहुमत में होने के बावजूद आम आदमी को बदलाव महसूस नहीं हो रहा है, जो उनके लिए बेहद शर्मनाक स्थिति है। प्रसाईं ने स्वीकार किया कि उन्हें कभी-कभी लगता है जैसे उनके ही चुनावी वादे उन पर ही भारी पड़ रहे हैं।
गरीबों के अंतिम संस्कार पर उठी आवाज
संसद में सबसे भावुक मुद्दा सांसद टीका संग्रौला ने उठाया। उन्होंने गरीब नागरिकों के अंतिम संस्कार के खर्च और व्यवस्था पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि कैसे एक गरीब व्यक्ति को अंतिम समय में भी सरकारी मदद नहीं मिल पाती। संग्रौला ने मांग की कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गरीब का अंतिम संस्कार सम्मानजनक हो। उन्होंने कहा कि जो नागरिक जीवन भर सरकार को टैक्स देता है, मरने के बाद उसे कम से कम एक जगह, लकड़ी और आग की सुविधा मुफ्त मिलनी चाहिए। सरकार का काम केवल कर वसूलना नहीं, बल्कि अपने असहाय नागरिकों का अभिभावक बनकर उन्हें सहारा देना भी है। इन सभी मुद्दों को हिन्दुस्थान समाचार के माध्यम से प्रमुखता से उजागर किया गया है, जो नेपाल की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर सवाल खड़े करता है।