Nepal News: नेपाल के सांप्रदायिक दंगों में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की संदिग्ध भूमिका का हुआ बड़ा खुलासा, खुफिया रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातें आई सामने।

Nura Basta14 August 20265 min read93 views
Nepal News: नेपाल के सांप्रदायिक दंगों में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की संदिग्ध भूमिका का हुआ बड़ा खुलासा, खुफिया रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातें आई सामने।

नेपाल के सुनसरी जिले में पिछले महीने 26 जुलाई की रात को शुरू हुए सांप्रदायिक दंगों के मामले में एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली बात सामने आई है। नेपाल के गृह मंत्रालय को देश की खुफिया एजेंसी राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग यानी एनआईडी (NID) की तरफ से एक प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी गई है, जिसमें पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई की संलिप्तता होने की बात कही गई है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है क्योंकि इससे सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान लग गया है। आम लोगों और सामान्य पाठकों के लिए यह जानना जरूरी है कि कैसे पड़ोसी देशों के कुछ लोग धार्मिक आयोजनों की آड़ में माहौल को बिगाड़ने की कोशिश करते हैं और किस तरह से सुनियोजित तरीके से दंगे भड़काए जाते हैं।

टर्की और बांग्लादेश के मौलानाओं की संदिग्ध गतिविधियां

खुफिया एजेंसी एनआईडी द्वारा नेपाल के गृह मंत्रालय को सौंपी गई रिपोर्ट में यह साफ बताया गया है कि दंगे के समय टर्की और बांग्लादेश से आए कुछ मौलानाओं की भारतीय सीमा से सटे इलाकों के मदरसों और मस्जिदों में उपस्थिति दर्ज की गई थी। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि भारत के सीमावर्ती जिलों में सांप्रदायिक दंगे करवाकर आईएसआई भारत की सीमा क्षेत्र को पूरी तरह से असुरक्षित और अशांत बनाने की साजिश रच रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, टर्की में रहने वाला पाकिस्तानी मूल का मौलाना मोहम्मद इलियास घुमान घटना के दिन यानी 26 जुलाई को सुनसरी जिले के देवानगंज की एक मस्जिद में पिछले पांच दिनों से रुका हुआ था। उसके साथ काठमांडू के जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती अबु बकर कासमी भी मौजूद थे, जिन्होंने स्थानीय स्तर पर कई गुप्त बैठकें की थीं।

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झंडे को लेकर शुरू हुआ था विवाद और फिर भड़की हिंसा

सुनसरी जिले के देवानगंज गांवपालिका के कप्तानगंज इलाके में 26 जुलाई को एक शिव मंदिर की खाली जमीन पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मुहर्रम का पर्व मनाने के लिए इस्लामिक झंडे लगाए थे। मुहर्रम का त्योहार खत्म होने के बाद से ही स्थानीय हिंदू समुदाय के लोग लगातार यह आग्रह कर रहे थे कि उस खाली जमीन से इन झंडों को हटा लिया जाए। इस बात को लेकर स्थानीय गांवपालिका के जनप्रतिनिधियों से लेकर सांसदों और पुलिस प्रशासन तक से लगातार एक महीने तक गुहार लगाई गई, लेकिन किसी ने भी मंदिर की खाली जमीन पर लगे उन इस्लामिक झंडों को नहीं हटाया। इसके बाद जब सावन महीने के सोमवार के दिन शिव मंदिर में जल चढ़ाने के लिए एक दिन पहले यानी 26 जुलाई की रात को कांवड़ियों का एक जत्था वहां से गुजर रहा था, तो पास के ही एक मदरसे से उन पर अचानक हमला बोल दिया गया। हैरानी की बात यह है कि उसी समय पास में मौजूद बिजली विभाग के ट्रांसफार्मर से जानबूझकर लाइट काट दी गई थी, ताकि चारों तरफ अंधेरा फैल जाए और हमलावरों को फायदा मिल सके।

बिजली काटने वाला कर्मचारी और पुलिस फायरिंग में मौत

एनआईडी की रिपोर्ट में इस बात का भी खास तौर पर उल्लेख किया गया है कि जिस व्यक्ति ने उस रात ट्रांसफार्मर से लाइन काटी थी, उसका नाम नसीम अंसारी है और वह बिजली विभाग में ही कार्यरत है। इस खूनी संघर्ष के दौरान नेपाल के सशस्त्र प्रहरी बल के इंस्पेक्टर राकेश राई के नेतृत्व में मौजूद फोर्स ने उग्र भीड़ और हालात को काबू में करने के लिए गोलियां चलाईं। स्थानीय लोगों के अनुसार इस गोलीबारी में कुल 21 लोगों को गोली लगने की जानकारी सामने आई थी। अब तक की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इनमें से तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दो गंभीर युवकों को अभी भी विराटनगर के एक अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया है। इनमें से एक दुर्भाग्यशाली युवक का हाथ तक काटना पड़ गया है। इस बड़े दंगे के बाद विराटनगर से लेकर वीरगंज तक के कुल आठ जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें सिरहा जिले में पुलिस की गोलीबारी से एक और व्यक्ति की जान चली गई।

प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े हैं मौलाना के तार

नेपाल की खुफिया एजेंसी एनआईडी की रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि आईएसआई के इशारे पर काम करने वाला मौलाना मुहम्मद इलियास घुमान प्रतिबंधित संगठन तब्लीगी जमात का एक बेहद प्रमुख सदस्य है। इतना ही नहीं, इस मौलाना का संबंध कई कुख्यात और प्रतिबंधित आतंकी संगठनों जैसे हरकत उल मुजाहिदीन, हरकत उल अंसार और हिजबुल मुजाहिद्दीन से भी होने की बात रिपोर्ट में बताई गई है। ये सभी आतंकी संगठन न केवल भारत में बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका और यूके में भी प्रतिबंधित हैं। गृह मंत्रालय को मिली रिपोर्ट के अनुसार मोहम्मद इलियास और इमाम मुफ्ती अबु बकर ने अपने साथ कुछ अन्य मौलवियों को लेकर भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे नेपाल के विराटनगर, रौतहट, नेपालगंज और कपिलवस्तु जैसे बेहद संवेदनशील जिलों का दौरा किया था। इन जिलों की मस्जिदों और मदरसों में उनका रुकना, वहां के कट्टरपंथियों के साथ गोपनीय बैठकें करना और उसके तुरंत बाद उन्हीं इलाकों में सुनसरी जैसे दंगे होना इस बात की ओर इशारा करता है कि इन सबके पीछे एक गहरी साजिश थी, जिसकी सूक्ष्म जांच करने की सिफारिश खुफिया एजेंसी ने की है।

बांग्लादेशी नागरिकों का टूरिस्ट वीजा पर नेपाल दौरा

जांच के दौरान एक और दिलचस्प और गंभीर बात यह सामने आई कि जिस दौरान मौलाना मुहम्मद इलियास नेपाल आया हुआ था और काठमांडू तथा भारतीय सीमा से सटे नेपाली जिलों में घूम रहा था, ठीक उसी समय बांग्लादेश के नौ मौलाना भी उन्हीं जिलों में सक्रिय रूप से मौजूद थे। नेपाल के इमिग्रेशन विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, गत 20 जुलाई को बांग्लादेश के नौ मौलवी ढाका से होते हुए काठमांडू पहुंचे थे। बटिक एयर की उड़ान संख्या OD 182 से काठमांडू उतरने वाले इन संदिग्धों में मोहम्मद अक्कास अली, अमीनुल इस्लाम, मो. मुस्ताफिजार रहमान, मोहद गोलाम मोस्तोफा, मो. मोक्लासुर रहमान, मोहम्मद मोनिरुज्जमान लावलु, सैयद शौकत अली, मोहम्मद मोन्सुर रहमान और मोहम्मद अनिसुर रहमान के नाम शामिल हैं। इमिग्रेशन विभाग के रिकॉर्ड में इन सभी के 30 दिनों के टूरिस्ट वीजा पर नेपाल आने की पुष्टि हुई है, जिसकी अब गहनता से जांच की जा रही है। इस पूरी घटना के बारे में अधिक विस्तृत जानकारी और मूल रिपोर्ट आप हिन्दुस्थान समाचार पर देख सकते हैं।

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