नेपाल में बड़ा विवाद, आधी रात को वरिष्ठ पत्रकार गिरफ्तार, सुबह घर और दफ्तर पर पड़ी छापेमारी.

पड़ोसी देश नेपाल से मीडिया जगत को हिला देने वाली एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां एक वरिष्ठ पत्रकार की आधी रात को हुई अचानक गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया है। नेपाल की राजधानी काठमांडू में 13 अगस्त को यह घटना घटी, जब चर्चित समाचार पत्र जनआस्था साप्ताहिक के प्रधान संपादक किशोर श्रेष्ठ को पुलिस ने देररात हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के विरोध में पत्रकारों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने जिला प्रशासन कार्यालय के बाहर पूरी रात बैठकर धरना दिया। इस घटना के अगले दिन यानी गुरुवार की सुबह पुलिस ने उनके घर और दफ्तर पर भी छापा मार दिया, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई है।
प्रेस की स्वतंत्रता पर बड़ा हमला
इस गिरफ्तारी के तुरंत बाद देश के कई प्रमुख पत्रकार संगठनों ने इसे सीधे तौर पर प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया है। पत्रकारों का आरोप है कि हाल ही में एक समाचार प्रकाशित किए जाने के कारण किशोर श्रेष्ठ को निशाना बनाया गया है। पुलिस प्रशासन द्वारा उन पर लगातार यह दबाव बनाया जा रहा है कि वे उस खबर के स्रोत यानी सोर्स का खुलासा करें। जब पत्रकार संगठनों को इस बात की भनक लगी तो वे भारी संख्या में जिला प्रशासन कार्यालय के बाहर इकट्ठा हो गए। प्रदर्शनकारी पत्रकारों ने रातभर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया और उनकी तत्काल रिहाई की मांग उठाई। उनका साफ कहना था कि यदि किसी प्रकाशित खबर से कोई आपत्ति या शिकायत थी, तो उसके लिए देश में तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था, लेकिन आधी रात को किसी पत्रकार को उठाकर दबाव बनाना पूरी तरह से लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।
घर और दफ्तर पर पुलिस की छापेमारी
रातभर चले विरोध प्रदर्शन के बाद गुरुवार की सुबह पुलिस का एक्शन और ज्यादा तेज हो गया। पुलिस बल ने किशोर श्रेष्ठ के आवास और उनके मीडिया संस्थान जनआस्था साप्ताहिक के दफ्तर पर पहुंचकर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस कार्रवाई के बाद से नेपाल के मीडिया गलियारों में यह गंभीर सवाल उठने लगा है कि क्या महज किसी खबर की रिपोर्टिंग या प्रकाशन को लेकर किसी पत्रकार के घर और मीडिया हाउस पर इस तरह का प्रशासनिक शिकंजा कसना न्यायसंगत है।
पुराने विवादों से भी जुड़ा रहा है नाम
आपको बता दें कि किशोर श्रेष्ठ और उनका मीडिया संस्थान पहले भी कई बार विवादों के घेरे में आ चुका है। इससे पहले मई 2026 में उनका एक विवादित ऑडियो भी सार्वजनिक हुआ था। उस समय उन पर यह गंभीर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने किसी राजनीतिक नेता के खिलाफ खबर छापने के एवज में पैसे लिए थे। हालांकि, उस दौरान श्रेष्ठ ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था और इसे उनके तथा उनके संस्थान की छवि खराब करने की एक सोची-समझी साजिश बताया था।
विपक्ष दलों ने सरकार को घेरा
वरिष्ठ पत्रकार की इस तरह आधी रात की गई गिरफ्तारी के खिलाफ अब राजनीतिक दलों ने भी मोर्चा खोल दिया है। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और माओवादी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल ‘प्रचण्ड’ समेत तमाम विपक्षी दलों के बड़े नेताओं ने सरकार की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। विपक्षी नेताओं का साफ तौर पर कहना है कि केवल एक समाचार लिखने या छापने की वजह से किसी पत्रकार को इस तरह गिरफ्तार करना प्रेस की आजादी का गला घोंटने जैसा है। विपक्ष ने सरकार के सामने यह सवाल भी खड़ा किया है और स्पष्टीकरण मांगा है कि आखिर किस कानूनी आधार के तहत यह गिरफ्तारी की गई है और उस प्रकाशित समाचार में ऐसा कौन सा बड़ा अपराध था जिसके लिए ऐसी दंडात्मक कार्रवाई जरूरी हो गई। इस पूरे घटनाक्रम पर नेपाल सरकार और पुलिस प्रशासन की तरफ से आगे क्या बयान आता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।