नेपाल में तिब्बती अध्ययन सम्मेलन हुआ रद्द, अब 23 से 29 अगस्त तक ऑनलाइन होगा पूरा कार्यक्रम.

नेपाल की राजधानी काठमांडू में होने वाला बहुप्रतीक्षित तिब्बती अध्ययन सम्मेलन अब ऑफलाइन की बजाय वर्चुअल माध्यम यानी ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा। इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर तिब्बतन स्टडीज बोर्ड की तरफ से यह आधिकारिक घोषणा की गई है कि तय समय के अनुसार ही इस कार्यक्रम को ऑनलाइन पूरा किया जाएगा। इस बड़े बदलाव के बाद अब दुनिया भर से जुड़ने वाले विद्वान और शोधकर्ता घर बैठे ही इस वैश्विक सम्मेलन का हिस्सा बन सकेंगे।
क्यों बदला गया कार्यक्रम का पूरा प्रारूप
इस सम्मेलन के सह-आयोजक के रूप में जुड़े काठमांडू विश्वविद्यालय से संबद्ध हिमालय सेंटर फॉर एशियन स्टडीज तथा सेंटर फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज ने इस पूरे आयोजन से अपने हाथ पीछे खींच लिए थे। स्थानीय स्तर पर असहजता और प्रशासनिक दबाव को देखते हुए इन संस्थानों ने खुद को अलग कर लिया। इसके बाद आयोजकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया था, जिसे हल करने के लिए बोर्ड को तुरंत कदम उठाना पड़ा।
तारीख 7 अगस्त को बोर्ड के निदेशक मंडल की एक आपातकालीन ऑनलाइन बैठक बुलाई गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया कि सम्मेलन के समन्वय की पूरी जिम्मेदारी बोर्ड खुद अपने हाथ में लेगा। 17वें सेमिनार को अब एक ऑनलाइन कार्यक्रम के रूप में संचालित किया जाएगा। सलाहकार बोर्ड की तरफ से फ्रांस्वा रोबिन और उल्रिके रोएस्लर ने मीडिया और जुड़े हुए लोगों को इस बदलाव की पूरी जानकारी दी है।
नेपाल सरकार और चीन का रुख
बोर्ड ने अपनी बात रखते हुए कहा है कि अंतिम समय में इस तरह से कार्यक्रम को रोकना भविष्य में नेपाल में किसी भी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के आयोजन पर बड़े सवाल खड़े करता है। इस घटनाक्रम की वजह से नेपाल को आर्थिक मोर्चे पर और अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा के मामले में भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। तिब्बती मामलों की संवेदनशीलता बहुत अधिक है और इस पर चीन की तरफ से भी अपनी चिंता जताई गई थी।
चीन की आपत्तियों और बढ़ती चिंताओं के बाद नेपाल सरकार ने पिछले हफ्ते ही इस सम्मेलन को नेपाल की जमीन पर आयोजित करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। नेपाल के मुख्य सचिव गोविंद बहादुर कार्की और विदेश मंत्रालय के सचिव अमृत बहादुर राई ने सीधे तौर पर काठमांडू विश्वविद्यालय को इस आयोजन को तुरंत रोकने का सख्त निर्देश जारी किया था। सरकार के इस कड़े रुख के बाद ही काठमांडू विश्वविद्यालय ने अपनी असमर्थता जताते हुए सारी जिम्मेदारी वापस बोर्ड को सौंप दी थी।
तैयारियों पर पानी और यात्रियों की मुश्किलें
आयोजकों ने इस पूरे मामले पर दुख जताते हुए बताया कि नेपाल में इस बड़े आयोजन को लेकर साल 2023 में ही काठमांडू विश्वविद्यालय के साथ आधिकारिक सहमति बन गई थी। इसके बाद पिछले तीन सालों से लगातार इस सम्मेलन की तैयारियों को अमलीजामा पहनाया जा रहा था। इन तीन सालों की लंबी तैयारी के दौरान किसी भी पक्ष ने इस पर कोई आपत्ति या चिंता नहीं जताई थी।
इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए 700 से अधिक प्रतिभागी पहले ही अपने हवाई जहाज के टिकट खरीद चुके थे और काठमांडू के अलग-अलग होटलों में अपने कमरे भी बुक करा चुके थे। अचानक बदले हालात और ऑनलाइन होने के फैसले से इन सभी लोगों को अपनी यात्रा योजनाओं में बदलाव करना पड़ रहा है, हालांकि बोर्ड ने तय तारीख यानी 23 से 29 अगस्त के बीच ही इसे सफलता पूर्वक पूरा करने का पूरा मन बना लिया है।