नेपाल में तिब्बती अध्ययन सम्मेलन हुआ रद्द, अब 23 से 29 अगस्त तक ऑनलाइन होगा पूरा कार्यक्रम.

Praggya Singh sabal12 August 20262 min read49 viewsWorld
नेपाल में तिब्बती अध्ययन सम्मेलन हुआ रद्द, अब 23 से 29 अगस्त तक ऑनलाइन होगा पूरा कार्यक्रम.

नेपाल की राजधानी काठमांडू में होने वाला बहुप्रतीक्षित इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर तिब्बतन स्टडीज का 17वां सेमिनार अब ऑफलाइन की बजाय पूरी तरह से वर्चुअल माध्यम यानी ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा। आयोजकों ने यह कड़ा फैसला नेपाल सरकार की रोक के बाद लिया है, जिससे इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के स्वरूप में बड़ा बदलाव आया है। 23 से 29 अगस्त तक चलने वाले इस सम्मेलन को अब ऑनलाइन ही पूरा किया जाएगा ताकि इसमें भाग लेने वाले शोधकर्ताओं और विद्वानों को परेशानी न हो।

काठमांडू यूनिवर्सिटी और सेंटर्स ने खींचे हाथ

इस सम्मेलन के सह-आयोजक के रूप में काठमांडू विश्वविद्यालय से जुड़े हिमालय सेंटर फॉर एशियन स्टडीज और सेंटर फॉर बुद्धिस्ट स्टडीज ने इस पूरे आयोजन से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। इसके बाद इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर तिब्बतन स्टडीज बोर्ड ने 7 अगस्त को एक आपातकालीन ऑनलाइन बैठक बुलाई। इस महत्वपूर्ण बैठक में बोर्ड के निदेशक मंडल ने खुद ही सम्मेलन के समन्वय की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेने का फैसला किया और इसे ऑनलाइन फॉर्मेट में शिफ्ट कर दिया। सलाहकार बोर्ड की ओर से फ्रांस्वा रोबिन और उल्रिके रोएस्लर ने मीडिया को इस बात की पूरी जानकारी दी है।

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नेपाल सरकार और चीन का एंगल

तिब्बती मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए चीन की तरफ से इस कार्यक्रम को लेकर गहरी चिंता जताई गई थी। पड़ोसी देश चीन के रुख के बाद नेपाल सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए पिछले सप्ताह इस सम्मेलन को देश में आयोजित करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। नेपाल के मुख्य सचिव गोविंद बहादुर कार्की और विदेश मंत्रालय के सचिव अमृत बहादुर राई ने सीधे तौर पर काठमांडू विश्वविद्यालय को इस आयोजन को तुरंत रोकने का निर्देश जारी किया था। सरकार के इस फरमान के बाद विश्वविद्यालय ने इस आयोजन से खुद को अलग कर लिया और सारी जिम्मेदारी वापस बोर्ड को सौंप दी.

आयोजकों और प्रतिभागियों को हुआ भारी नुकसान

बोर्ड का कहना है कि इस बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए नेपाल के साथ साल 2023 में ही काठमांडू विश्वविद्यालय के माध्यम से आधिकारिक सहमति बन चुकी थी। पिछले तीन साल से इस सम्मेलन की तैयारियों में दिन-रात काम चल रहा था और किसी भी पक्ष ने इस दौरान कोई आपत्ति नहीं जताई थी। स्थिति यह है कि इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए 700 से अधिक प्रतिभागी पहले ही अपने महंगे हवाई टिकट खरीद चुके थे और काठमांडू के अलग-अलग होटलों में अपने कमरे भी बुक करा चुके थे। अंतिम समय में कार्यक्रम रोके जाने से नेपाल की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को तगड़ा झटका लगा है और भविष्य में देश में ऐसे बड़े कार्यक्रम आयोजित करने पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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