कुवैत में काम करने वाले नेपाली नागरिकों की संख्या में भारी उछाल आया है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 तक कुवैत में रहने वाले नेपाली नागरिकों की संख्या आधिकारिक तौर पर 1 लाख 75 हजार (1,75,000) का आंकड़ा पार कर गई है। कुवैत में रोजगार के अवसरों और नेपाल में आर्थिक चुनौतियों के कारण लोग बड़ी संख्या में खाड़ी देश का रुख कर रहे हैं। हालांकि, बढ़ती आबादी के साथ ही कुवैत सरकार ने वीज़ा और एग्जिट परमिट से जुड़े नियमों में भी कई बड़े बदलाव किए हैं।

संख्या में 23% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

कुवैत की ‘पब्लिक अथॉरिटी फॉर सिविल इंफॉर्मेशन’ (PACI) के आंकड़ों से पता चलता है कि यह समुदाय कितनी तेजी से बढ़ा है। साल 2024 के अंत में यहां नेपाली नागरिकों की संख्या 140,441 थी, जो पिछले साल के मुकाबले 23.4% ज्यादा थी। यह सिलसिला 2025 में भी जारी रहा और अब यह संख्या 1.75 लाख से ऊपर पहुंच गई है।

हालांकि, इन आंकड़ों के पीछे कुछ चिंताजनक खबरें भी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2025 में कुवैत में 95 नेपाली कामगारों की मौत दर्ज की गई, और साल के अंत तक 59 नेपाली नागरिक कुवैत की जेलों में बंद पाए गए।

सैलरी, वीज़ा फीस और खर्च का पूरा हिसाब

कुवैत जाने की सोच रहे या वहां रह रहे लोगों के लिए खर्च और कमाई का गणित समझना बहुत जरूरी है। 2025-2026 के लिए आधिकारिक नियम और बाज़ार की हकीकत कुछ इस प्रकार है:

न्यूनतम वेतन (प्राइवेट सेक्टर) 75 KWD (लगभग $242)
घरेलू कामगार सैलरी 60 से 75 KWD
वर्क वीज़ा फीस 150 KWD
रेसिडेंसी रिन्यूअल फीस 20 KWD (पहले से दोगुना)
एजेंट का खर्चा (हकीकत) 3 लाख नेपाली रुपये से ज्यादा

भले ही नेपाल सरकार “फ्री वीज़ा, फ्री टिकट” की बात करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि कई कामगार एजेंटों को भारी रकम देकर कुवैत पहुंच रहे हैं।

नया ‘Exit Permit’ नियम और 5 साल की सीमा

कुवैत सरकार ने जुलाई 2025 से एक बड़ा नियम लागू किया है, जिसका असर हर प्रवासी कामगार पर पड़ रहा है। अब प्राइवेट सेक्टर के कामगारों को देश छोड़ने के लिए (चाहे छुट्टी पर जाना हो या हमेशा के लिए) ‘Exit Permit’ लेना अनिवार्य है। यह परमिट ‘Sahel’ या ‘Ashal’ मोबाइल ऐप के जरिए लेना होता है।

  • नियम के मुताबिक, एम्प्लॉयर को यात्रा से कम से कम 7 दिन पहले डिजिटल मंजूरी देनी होती है।
  • मानवाधिकार संगठनों ने इस नियम की आलोचना की है, लेकिन कुवैत के आंतरिक मंत्री शेख फहद अल-यूसुफ का कहना है कि यह नियम लेबर मार्केट को आधुनिक बनाने और भागने वाले कामगारों (Runaway workers) को रोकने के लिए लाया गया है।
  • इसके अलावा, 2024 के अंत में पास हुए एक कानून के तहत, अब ज्यादातर प्रवासी कामगारों के लिए कुवैत में रहने की अधिकतम सीमा 5 साल तय कर दी गई है।

जानकारों का कहना है कि कुवैत में कानून बहुत सख्त हैं, खासकर नशीले पदार्थों और शराब को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति है। ऐसे में कामगारों को कानूनी पचड़ों से बचने के लिए वहां के नियमों का पूरी तरह पालन करना चाहिए।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.