International Criminal Court पर अमेरिका का कड़ा एक्शन, इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने किया समर्थन.

Aanya18 August 20263 min read52 viewsWorld
International Criminal Court पर अमेरिका का कड़ा एक्शन, इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने किया समर्थन.

इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने 18 August 2026 को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय यानी ICC के अधिकारियों के खिलाफ अमेरिका द्वारा लगाए गए नए प्रतिबंधों का खुलकर समर्थन किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इन प्रतिबंधों की घोषणा की थी, जिसमें जापान की ICC अध्यक्ष Tomoko Akane और सेनेगल के वरिष्ठ ट्रायल वकील Abdoulaye Seye को निशाना बनाया गया है। वकील Abdoulaye Seye गाजा में मानवता के खिलाफ कथित अपराधों के मामले में प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट की मांग करने की प्रक्रिया में शामिल थे। इस बड़े कदम के बाद से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और आम लोगों के बीच भी इस बात की चर्चा हो रही है कि आखिर वैश्विक अदालत और देशों के बीच यह टकराव क्यों बढ़ रहा है।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने क्यों उठाए यह कदम

अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इन उपायों को सही ठहराते हुए कहा कि जिन अधिकारियों को निशाना बनाया गया है, वे उन देशों के व्यक्तियों पर मुकदमा चलाने की कोशिश कर रहे थे जिन्होंने ICC के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने अदालत को एक भ्रष्ट और राजनीतिक रूप से प्रेरित निकाय बताया जो अमेरिका की संप्रभुता और इसराइल के साथ उसके गठबंधन के लिए खतरा पैदा करता है। अमेरिकी प्रशासन का यह मानना है कि इस अदालत ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है इसलिए उन्होंने सदस्य देशों से इस अदालत से पीछे हटने का आग्रह किया है। अमेरिका शुरुआत से ही इस बात का विरोध करता रहा है कि जो देश इसके सदस्य नहीं हैं, उनके नागरिकों पर यह अदालत अपनी कार्रवाई न थोपे।

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कंगारू कोर्ट है अंतरराष्ट्रीय अदालत

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इस अदालत को एक कंगारू कोर्ट करार दिया। उन्होंने इस संस्था की आलोचना करते हुए इसे एक भ्रष्ट और नैतिक रूप से दिवालिया निकाय बताया जो इसराइल के खिलाफ साजिश और विच हंट चला रहा है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अदालत की इन हरकतों से इसराइल के सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह एक बहुत ही खतरनाक अंतरराष्ट्रीय मिसाल कायम कर रहा है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले दुनिया भर की सुरक्षा व्यवस्था और न्याय प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं और चुनिंदा देशों को निशाना बनाने का एक गलत जरिया बन सकते हैं।

ICC का कड़ा विरोध और कानूनी प्रावधान

दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय अदालत ने 18 August 2026 को अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की कड़ी निंदा की। अदालत ने इसे उसकी स्वतंत्रता में सीधा हस्तक्षेप और कानून के शासन को कमजोर करने का प्रयास बताया। अदालत ने साफ किया कि वह Rome Statute के तहत निष्पक्ष रूप से अपना काम करती रहेगी और किसी भी तरह की धमकी के आगे झुकेगी नहीं। अदालत का मानना है कि न्यायिक अधिकारियों को इस तरह से डराना या धमकाना वैश्विक कानूनी व्यवस्था के लिए बहुत बड़ा खतरा है। चूंकि अमेरिका Rome Statute का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, इसलिए उसने पहले भी अफगानिस्तान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों और इस्राइली अधिकारियों की जांच कर रहे अदालत के कर्मियों के खिलाफ प्रतिबंधों का इस्तेमाल किया है। इन नए उपायों के तहत अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाई गई है और नामित ICC अधिकारियों के वित्तीय लेन-देन को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया गया है।

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