Israel Update: नेतन्याहू का दो टूक बयान, ईरान को कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे.

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक बार फिर अपना कड़ा रुख साफ कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका देश किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा। प्रधानमंत्री ने यह बात यरुशलम में 09 अगस्त को एक कैबिनेट बैठक के दौरान कही। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ कूटनीतिक बातचीत का नतीजा चाहे जो भी निकले, इजराइल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा।
समझौता हो या न हो, नीति साफ है
कैबिनेट बैठक में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा कि वह देश और दुनिया के सामने फिर से यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि चाहे कोई समझौता हो या न हो, जब तक वह प्रधानमंत्री के पद पर हैं, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं आ सकते हैं। इजराइल सरकार का मानना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम क्षेत्रीय और वैश्विक शांति के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है। यही वजह है कि तेल अवीव इस मुद्दे पर अपने सुरक्षा हितों से पीछे हटने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है।
अमेरिका और इजराइल की साझा रणनीति
प्रधानमंत्री का यह ताजा बयान ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान के बढ़ते परमाणु कदमों को रोकने के लिए इजराइल और अमेरिका के बीच लगातार कूटनीतिक प्रयास और सैन्य स्तर पर चर्चाएं चल रही हैं। दोनों देशों ने अपने अभियानों का मुख्य उद्देश्य यही तय किया है कि किसी भी तरह से ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाए। तेहरान पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है ताकि उसकी सैन्य महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाई जा सके।
ईरान का पक्ष और शांतिपूर्ण दावे
दूसरी तरफ, ईरान लगातार इन तमाम अंतरराष्ट्रीय आरोपों से इनकार करता आया है। तेहरान का हमेशा से यही कहना रहा है कि उनका परमाणु कार्यक्रम किसी भी तरह के हथियार विकसित करने के लिए नहीं चल रहा है। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि उनका पूरा कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों जैसे कि बिजली उत्पादन और चिकित्सा कार्यों के लिए ही काम कर रहा है। हालांकि, इजराइल और पश्चिमी देश इन दावों पर भरोसा नहीं करते हैं।
सुरक्षा हितों पर अडिग इजराइल
नेतन्याहू के इस कड़े बयान से यह साफ हो जाता है कि भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत और कूटनीति का दौर जारी हो, लेकिन इजराइल अपनी सुरक्षा के मामले में कोई जोखिम उठाने के मूड में नहीं है। कूटनीतिक वार्ताओं के बीच भी इजराइल का यह रुख इस बात की गवाही देता है कि वे ईरान को लेकर अपनी नीतियों पर पूरी तरह कायम हैं। इस पूरी स्थिति पर दुनियाभर की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट की राजनीति और सुरक्षा पर पड़ना तय है।