इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को हिला देने वाले कई बड़े बयान दिए हैं। उन्होंने साफ़ कह दिया है कि अब इज़राइल को अमेरिका से मिलने वाली आर्थिक मदद की ज़रूरत नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने फिलिस्तीन को एक अलग देश बनाने के विचार को पूरी तरह खारिज कर दिया है और ईरान को फिर से सैन्य हमले की चेतावनी दी है।

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अमेरिका की मदद पर फैसला

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिकी वित्तीय सहायता को ‘वेलफेयर’ या सरकारी भत्ते जैसा बताया है। 30 जून 2026 को उन्होंने कहा कि वह इस मदद को बंद करना चाहते हैं क्योंकि इज़राइल अब आत्मनिर्भर होना चाहता है। नेतन्याहू का लक्ष्य एक ऐसा स्वतंत्र हथियार नेटवर्क तैयार करना है जिससे इज़राइल को अपने हथियारों के लिए किसी दूसरे देश पर निर्भर न रहना पड़े।

इस बदलाव के बीच अमेरिकी कांग्रेस में सांसद मार्लिन स्टुत्ज़मैन ने एक प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव में सैन्य सहायता को धीरे-धीरे खत्म करके रक्षा और व्यापार के एक नए ढांचे में बदलने की बात कही गई है, जिसका नेतन्याहू ने समर्थन किया है।

फिलिस्तीन देश बनाने का विरोध

फिलिस्तीन के मुद्दे पर नेतन्याहू ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि समुद्र से लेकर जॉर्डन नदी के बीच कोई फिलिस्तीनी राज्य नहीं बनेगा। उन्होंने दो-राज्य समाधान (two-state solution) को पूरी तरह नकार दिया है। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद एक ‘आतंकी राज्य’ के गठन को रोक रहे हैं और भविष्य में भी ऐसा ही रहेगा।

ईरान पर हमले की तैयारी

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नेतन्याहू ने चेतावनी दी है कि अगर ज़रूरत पड़ी तो इज़राइल तीसरी बार भी हमला करेगा। उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे।

इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने इज़राइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) को ईरान पर स्वतंत्र हमले की योजना तैयार करने का आदेश दिया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि अगर ईरान ने इज़राइल पर मिसाइल दागी, तो इज़राइल पूरी ताकत से जवाब देगा और इसके लिए लक्ष्य पहले ही तय कर लिए गए हैं।