इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर गाजा संघर्ष को लंबा खींचने और शांति समझौते से बचने के लगे गंभीर आरोप.

गाजा संघर्ष और मध्य पूर्व के देशों में चल रहे तनाव के बीच इस्राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu को लेकर एक बड़ी बात सामने आई है। 19 अगस्त 2026 को अल जज़ीरा इंग्लिश पर छपे एक ओपिनियन पीस में यह बात कही गई है कि Benjamin Netanyahu किसी भी शांति समझौते से बचना चाहते हैं ताकि आगामी October 2026 के चुनावों में उनकी राजनीतिक स्थिति पर कोई बुरा असर न पड़े। विश्लेषक ओर गोल्डबर्ग के अनुसार, वह ईरान, फिलिस्तीनी गुटों, हिजबुल्लाह और सीरिया के साथ लगातार टकराव की स्थिति बनाए रखकर खुद को 'Mr. Security' के रूप में पेश करते हैं ताकि उन्हें किसी भी संभावित राजनीतिक नुकसान का सामना न करना पड़े।
हमास और इस्राइल के बीच बढ़ता तनाव
इसी बीच 19 अगस्त 2026 को हालात उस समय और ज्यादा खराब हो गए जब हमास ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu पर संघर्ष विराम वार्ताओं को जानबूझकर कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया। यह बयान तब आया जब गाजा सिटी के एक कैफे पर इस्राइली ड्रोन हमले में 6 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई। हमास ने अपने पुराने गाजा संघर्ष विराम रोडमैप पर टिके रहने की बात दोहराई और अमेरिका तथा अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों से अपील की कि वे इस्राइल पर शर्तों को मानने के लिए ज्यादा दबाव बनाएं।
अमेरिकी शांति प्रस्ताव और इस्राइल का रुख
इन घटनाओं से ठीक पहले 17 अगस्त 2026 को अमेरिकी मध्य पूर्व के दूत Jared Kushner और प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच राष्ट्रपति Donald Trump के शांति प्रस्ताव को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। हमास की तरफ से इस प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने के बावजूद Benjamin Netanyahu ने इस अमेरिकी समर्थित योजना को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि इस्राइल के पीछे हटने से पहले हमास को पूरी तरह से हथियार डालने होंगे। मध्य पूर्व मामलों की विशेषज्ञ Phyllis Bennis ने 10 अगस्त 2026 को यह साफ किया था कि इस्राइल का इस प्रस्ताव को ठुकराना कोई नई बात नहीं है क्योंकि अमेरिकी दबाव केवल कागजी साबित हो रहा है और इसका असर तभी दिखेगा जब सैन्य सहायता पर रोक लगाई जाएगी।
इस्राइली जनता की राय और राजनीतिक फायदे
इस्राइल के अंदरूनी हालात की बात करें तो जनता की राय इस मामले में बंटी हुई नजर आती है। हाल ही में आए एक सर्वे के अनुसार, लगभग 45 प्रतिशत लोग गाजा शांति समझौते के खिलाफ हैं, जबकि 37 प्रतिशत लोग दोबारा लड़ाई शुरू करने के पक्ष में हैं और केवल 17 प्रतिशत लोग मौजूदा स्थिति को बनाए रखना चाहते हैं। इसके अलावा, सर्वे में शामिल दो-तिहाई लोगों ने दक्षिणी लेबनान पर इस्राइली कब्जे को जारी रखने का समर्थन किया है, और लगभग 50 प्रतिशत लोग ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान चलाने की बात करते हैं। जानकारों का मानना है कि यह चल रहा संघर्ष प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों से लोगों का ध्यान भटकाने में मदद कर रहा है और साथ ही घरेलू रक्षा उद्योग को भी इससे फायदा पहुंच रहा है।