UAE पर मंडराया संकट, अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों से गल्फ देशों में भी बढ़ी हलचल.

इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने 25 अगस्त 2026 को ईरान के साथ किसी भी तरह के कूटनीतिक समझौते की संभावना पर बड़ा सवाल उठाया और ईरान के नेताओं को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। जेरूसलम में इजरायली प्रवासियों की एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ किया कि उन्होंने 28 जुलाई को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के साथ बैठक के दौरान तीन मुख्य रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की थी। इन रणनीतियों में एक राजनीतिक समझौता, सैन्य कार्रवाई और घेराबंदी को और ज्यादा मजबूत करना शामिल था। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और ईरान के बढ़ते कदमों पर गहरी चिंता व्यक्त की थी, जिसके बाद से लगातार कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बैठकों का दौर जारी है।
अमेरिका का आर्थिक डी-डे और कड़े प्रतिबंध
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 24 अगस्त 2026 को शुरू किए गए अमेरिकी economic D-Day अभियान की इजरायली प्रधानमंत्री ने जमकर सराहना की और इसे घेराबंदी मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा बताया। इन नए और व्यापक प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से पंगु बनाना है, जिसके तहत विमानन, शिपिंग, सोना और डिजिटल संपत्ति जैसे अहम क्षेत्रों को सीधा निशाना बनाया गया है। इन प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले सहायक उपायों का असर चीन, यूरोप, हांगकांग, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में काम करने वाले कई व्यापारिक संस्थानों और कंपनियों पर भी पड़ सकता है। इन देशों में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी भी रहते हैं और व्यापार तथा नौकरी के सिलसिले में आवाजाही करते हैं, जिससे इस आर्थिक दबाव का असर अप्रत्यक्ष रूप से क्षेत्रीय बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।
ईरान की प्रतिक्रिया और संयुक्त राष्ट्र में गुहार
बढ़ते तनाव के बीच ईरान की सेना ने 26 अगस्त 2026 को दावा किया कि उन्होंने मौजूदा संघर्ष के दौरान क्षतिग्रस्त हुए अपने सभी हथियार प्रणालियों को पूरी तरह से ठीक कर लिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राहत पाने के लिए ईरानी अधिकारियों ने कूटनीतिक रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत और उप स्थायी प्रतिनिधि Gholamhossein Darzi ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आग्रह किया कि वह अमेरिका की इन एकतरफा और जबरन थोपी गई कार्रवाइयों की कड़ी निंदा करे। वहीं दूसरी ओर, ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने 25 अगस्त की रात को जानकारी दी कि ओमान के साथ हो रही बातचीत के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक नया समझौता हो सकता है, जिसके तहत इस रास्ते से सभी सैन्य जहाजों को पूरी तरह से बाहर रखा जा सकता है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य अधिकारियों की बैठक
इस बड़े कूटनीतिक और सुरक्षा बदलाव से पहले इजराइल रक्षा बलों (IDF) के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल Eyal Zamir और अमेरिकी वायुसेना प्रमुख जनरल Kenneth S. Wilsbach के बीच 23 अगस्त 2026 को एक उच्च स्तरीय बैठक हुई थी। इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों सैन्य अधिकारियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा के हालातों पर चर्चा की और इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि अब केवल सैन्य हमलों के बजाय किस तरह से आर्थिक दबाव को मुख्य हथियार बनाया जाए। गल्फ देशों में काम करने वाले प्रवासियों और वहां की गतिविधियों पर नजर रखने वाले लोगों के लिए यह स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है, क्योंकि क्षेत्र में किसी भी प्रकार के तनाव से आम जनजीवन और उड़ानों तथा शिपिंग पर असर पड़ सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई बेहतर समझौता सामने आता है तो वह उसका विरोध नहीं करेंगे, लेकिन वर्तमान ईरानी अधिकारियों के साथ किसी समझौते की संभावना पर उन्हें गहरा संदेह है और इजराइल की रक्षा के लिए सैन्य विकल्प हमेशा खुला हुआ है।