इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने 28 जुलाई 2026 को व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से मुलाकात की। यह बैठक करीब 90 मिनट तक चली, जिसमें ईरान पर दबाव बढ़ाने, सीरिया की स्थिति और सऊदी अरब के साथ होने वाले नए परमाणु समझौते को लेकर चर्चा हुई।

ईरान पर सख्ती और सुरक्षा के मुद्दे

इस बैठक में Netanyahu ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए आर्थिक और सैन्य दबाव बनाए रखने की बात कही। 28 जुलाई को ही जॉर्डन में अमेरिकी बलों ने ईरान की एक बैलिस्टिक मिसाइल को मार गिराया। वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, इराक में ईरान समर्थित आतंकवादियों के खिलाफ अमेरिकी और सऊदी बलों ने संयुक्त कार्रवाई की है। Netanyahu ने साफ किया कि अगर ईरान कोई हमला करता है, तो इजराइल बहुत सख्त जवाब देगा।

सऊदी अरब के परमाणु समझौते पर चिंता

इस दौरान सऊदी अरब के साथ अमेरिका के नए नागरिक परमाणु समझौते को लेकर भी चिंता जताई गई। Donald Trump का कहना है कि इस समझौते में यूरेनियम संवर्धन पर रोक रहेगी, लेकिन अभी तक किसी भी आधिकारिक घोषणा में इजराइल के साथ सऊदी अरब के सामान्य संबंधों का जिक्र नहीं है। सऊदी अरब अपनी ओर से फिलिस्तीनी राज्य के गठन की दिशा में ठोस प्रगति की शर्त रखता है, जिसका Netanyahu फिलहाल विरोध कर रहे हैं।

सीरिया और रक्षा सहयोग

सीरिया के मुद्दे पर Netanyahu ने राष्ट्रपति Trump को नक्शे दिखाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीरिया में इजराइल की मौजूदगी का मकसद केवल ईरान और हिजबुल्लाह जैसे समूहों को अपनी सीमा के पास आने से रोकना है। इसके अलावा, अमेरिका और इजराइल अब पारंपरिक सैन्य वित्तपोषण के बजाय साझा तकनीक और रणनीतिक परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रहे हैं। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने पहले ही National Defense Authorization Act (NDAA) पारित किया है, जिसके तहत दोनों देशों के संयुक्त सैन्य प्रोजेक्ट्स के लिए 750 मिलियन डॉलर आवंटित किए गए हैं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.