केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने E20 इथेनॉल मिश्रण नीति से खुद को अलग करते हुए बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने 29 जुलाई 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट में 11 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया है। यह मामला सोशल मीडिया पर चल रहे उन डीपफेक वीडियो को लेकर है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि गडकरी अपने परिवार के शुगर मिलों को फायदा पहुंचाने के लिए यह नीति ला रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके परिवार की मिलों की हिस्सेदारी कुल उत्पादन का 0.5% से भी कम है।
📰: UAE के राष्ट्रपति पहुंचे स्लोवाकिया, द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए हुआ अहम दौरा।
पेट्रोल और इंजन पर मंत्रालय की सफाई
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ किया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ी के इंश्योरेंस क्लेम को खारिज नहीं किया जा सकता है। मंत्रालय ने इंजन खराब होने या कीड़े आकर्षित होने जैसी बातों को वैज्ञानिक रूप से गलत बताया है। हालांकि, यह स्वीकार किया गया है कि हाईवे पर गाड़ी चलाने के दौरान माइलेज में 3% से 5% तक की कमी आ सकती है, लेकिन शहरी इलाकों में इसका असर बहुत कम है।
प्रिमियम पेट्रोल और भविष्य की योजनाएं
पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने संसद में जानकारी दी कि XP100, poWer100 और Speed100 जैसे प्रीमियम पेट्रोल में इथेनॉल नहीं मिलाया जाता है और सरकार की फिलहाल सामान्य पेट्रोल के पुराने E0 या E10 संस्करणों को वापस लाने की कोई योजना नहीं है। एक हालिया सर्वे में सामने आया कि 2023 से पहले की कार रखने वाले करीब दो-तिहाई लोगों ने माइलेज घटने की शिकायत की है। सरकार ने यह भी माना है कि कुछ पुराने BS-III वाहनों में रबर के पार्ट्स को बदलने की जरूरत पड़ सकती है।
