NLR India ने पूरे किए 27 साल, कुष्ठ रोग को जड़ से खत्म करने के लिए अब ‘लास्ट माइल’ एक्शन पर जोर

No Leprosy Remains (NLR) India ने कुष्ठ रोग से प्रभावित लोगों की जिंदगी बदलने के अपने सफर के 27 साल पूरे कर लिए हैं। इस खास मौके पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें सरकारी अफसरों, सेहत विशेषज्ञों और समाज के विभिन्न वर्गों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन का मुख्य मकसद बीमारी को पूरी तरह खत्म करना और इससे जुड़ी सामाजिक बुराइयों को दूर करना था।

कार्यक्रम में कौन शामिल हुआ और क्या बातें हुईं?

यह कार्यक्रम 25 अप्रैल 2026 को आयोजित किया गया था। इसमें नीदरलैंड की राजदूत Marisa Gerards मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचना मुश्किल जरूर है लेकिन नामुमकिन नहीं। उन्होंने जोर दिया कि हमदर्दी और साझेदारी के जरिए यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि कोई भी इलाज से वंचित न रहे।

बीमारी को खत्म करने के लिए क्या रणनीति बनी है?

कार्यक्रम के दौरान ‘ग्लोबल लेप्रोसी स्ट्रेटजी 2021-2030’ का जिक्र किया गया जिसे ‘टुवर्ड्स जीरो लेप्रोसी’ नाम दिया गया है। इस रणनीति में कुछ मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दिया गया है:

  • बीमारी की रोकथाम के तरीकों को बढ़ाना और नए रोडमैप तैयार करना।
  • बीमारी से होने वाली जटिलताओं का सही समय पर इलाज करना।
  • मरीजों के मानवाधिकारों की रक्षा करना और समाज में उनके प्रति भेदभाव को खत्म करना।
  • सरकारी प्रोग्राम, गैर-लाभकारी संस्थाओं और प्राइवेट सेक्टर के बीच सहयोग बढ़ाना।

मरीजों के दर्द और सामाजिक भेदभाव पर चर्चा

दिल्ली के Jeevan Deep Kushth Ashram की रहने वाली Bhimwati ने अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें समाज में भेदभाव और तिरस्कार का सामना करना पड़ा। उन्होंने पुरजोर तरीके से मांग की कि उनके बच्चों को समाज में बराबरी का सम्मान मिलना चाहिए और उन्हें आगे बढ़ने के हर मौके मिलने चाहिए ताकि वे एक गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।