नोएडा के इंडस्ट्रियल एरिया में पिछले चार दिनों से चल रहा मज़दूरों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। 13 अप्रैल को मज़दूरों ने जमकर तोड़फोड़ की और पुलिस की गाड़ियों में आग लगा दी। इस हंगामे की बड़ी वजह अमेरिका और इसराइल का ईरान के साथ युद्ध है, जिससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ गई है और आम मज़दूरों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है।

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मज़दूरों की क्या मांगें हैं और क्यों हुआ बवाल?

नोएडा के गारमेंट, ऑटो कॉम्पोनेंट और इंजीनियरिंग सेक्टर के हज़ारों मज़दूर सड़कों पर उतरे। उनकी मुख्य मांग हरियाणा की तर्ज पर न्यूनतम वेतन में 35% की बढ़ोतरी करना है। इसके अलावा वे समय पर सैलरी, डबल ओवरटाइम पैसा और बेहतर काम करने की स्थिति की मांग कर रहे हैं। मज़दूरों का कहना है कि युद्ध की वजह से रसोई गैस और ईंधन के दाम बढ़ गए हैं, जिससे घर चलाना मुश्किल हो गया है।

प्रशासन के कड़े निर्देश और पुलिस की कार्रवाई

हिंसा को रोकने के लिए नोएडा पुलिस ने PAC और RAF की भारी टुकड़ियों को तैनात किया। भीड़ को काबू करने के लिए आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल किया गया। जिला मजिस्ट्रेट Medha Roopam ने फैक्ट्री मालिकों को आदेश दिया है कि वे मज़दूरों के अधिकारों का ध्यान रखें और कोई गलत तरीके से नौकरी से न निकाला जाए। यूपी के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने इस विवाद को सुलझाने के लिए एक हाई लेवल कमेटी बनाने का निर्देश दिया है।

मुख्य मांगें और सरकारी निर्देश विवरण
वेतन बढ़ोतरी हरियाणा की तरह 35% का इजाफा
ओवरटाइम डबल रेट पर भुगतान
सैलरी की तारीख हर महीने की 10 तारीख तक भुगतान
बोनस 30 नवंबर तक बोनस का भुगतान
सुविधाएं साप्ताहिक छुट्टी और सैलरी स्लिप
समिति शिकायत निवारण कमेटी का गठन