North Korea Missile Launch: अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास से ठीक पहले उत्तर कोरिया ने दागी बैलिस्टिक मिसाइल, फिर बढ़ा तनाव.

Nura Basta15 August 20265 min read61 viewsWorld
North Korea Missile Launch: अमेरिका और दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास से ठीक पहले उत्तर कोरिया ने दागी बैलिस्टिक मिसाइल, फिर बढ़ा तनाव.

दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच होने वाले बड़े संयुक्त सैन्य अभ्यास से ठीक पहले कोरियाई प्रायद्वीप में एक बार फिर से तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। उत्तर कोरिया ने अपनी जिद को जारी रखते हुए बुधवार सुबह ईस्ट सी की ओर एक बैलिस्टिक मिसाइल को दागा है। दक्षिण कोरियाई सेना के अनुसार, पिछले एक सप्ताह से भी कम समय के भीतर उत्तर कोरिया की तरफ से किया गया यह दूसरा मिसाइल लॉन्च है, जिससे आसपास के देशों की चिंता काफी ज्यादा बढ़ गई है।

मिसाइल लॉन्च की पूरी जानकारी और दूरी

दक्षिण कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी योनहाप के मुताबिक, दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ यानी JCS ने इस बात की जानकारी दी है कि इस मिसाइल लॉन्च का पता बुधवार सुबह करीब 6 बजे पूर्वी तट के वॉनसन इलाके से चला। इस खतरनाक मिसाइल ने हवा में 700 किलोमीटर से अधिक की लंबी दूरी तय की है। दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी सैन्य अधिकारी अभी इस मिसाइल के सटीक प्रकार और उसकी तकनीकी विशेषताओं का बहुत ही बारीकी से विस्तृत विश्लेषण कर रहे हैं ताकि इसकी पूरी क्षमता का अंदाजा लगाया जा सके।

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हालांकि सेना की तरफ से अभी तक मिसाइल के प्रकार की कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इसकी उड़ान की कुल दूरी को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल हो सकती है। उत्तर कोरिया के पास पहले से ही KN-23 जैसी कम दूरी की खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं, जिनकी तकनीक रूस की इस्कंदर मिसाइल प्रणाली से काफी हद तक मिलती-जुलती मानी जाती है। इन खास मिसाइलों की अनुमानित अधिकतम रेंज लगभग 700 से 800 किलोमीटर तक की होती है, जो किसी भी नजदीकी लक्ष्य को आसानी से निशाना बना सकती हैं।

पुराने परीक्षण और सैन्य अभ्यास का विरोध

यह ताजा मिसाइल परीक्षण ठीक उस पिछले लॉन्च के छह दिन बाद किया गया है जो पिछले गुरुवार को हुआ था। उस समय भी दक्षिण कोरियाई सेना ने इसे कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल ही करार दिया था। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे बेहद संवेदनशील समय पर सामने आया है जब दक्षिण कोरिया और अमेरिका अगले सप्ताह अपना बहुत ही प्रमुख वार्षिक सैन्य अभ्यास 'उल्ची फ्रीडम शील्ड' को आधिकारिक तौर पर शुरू करने जा रहे हैं। प्योंगयांग हमेशा से ही इन संयुक्त सैन्य अभ्यासों की बहुत कड़ी आलोचना करता आया है और खुले तौर पर इन्हें युद्ध की खुली तैयारी बताता रहा है। उत्तर कोरिया का पुराना इतिहास रहा है कि वह ऐसे बड़े सैन्य अभ्यासों के दौरान या फिर उनके शुरू होने से ठीक पहले अपने घातक हथियारों का परीक्षण करके अपना कड़ा विरोध दर्ज कराता है।

विशेषज्ञों की राय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

आम तौर पर उत्तर कोरिया किसी भी मिसाइल परीक्षण के ठीक अगले दिन अपने सरकारी मीडिया के माध्यम से उसकी आधिकारिक जानकारी दुनिया को देता है। लेकिन सबसे हैरानी की बात यह है कि पिछले सप्ताह हुए लॉन्च को लेकर प्योंगयांग की तरफ से कोई भी आधिकारिक रिपोर्ट जारी नहीं की गई थी। इस चुप्पी को देखते हुए रक्षा विशेषज्ञों ने यह संभावना जताई है कि शायद पिछला परीक्षण पूरी तरह से असफल रहा हो, या फिर किसी बिल्कुल नई मिसाइल प्रणाली का परीक्षण किया गया हो, या फिर लंबी दूरी की मिसाइल को ही कम दूरी के प्रक्षेपवक्र पर जानबूझकर दागा गया हो।

यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कोरियन स्टडीज के वरिष्ठ प्रोफेसर यांग मू-जिन ने इस मामले पर बात करते हुए कहा कि बुधवार का यह परीक्षण पिछले सप्ताह के ही लॉन्च को दोहराने की एक कोशिश हो सकता है, जो तकनीकी कारणों से संभवतः विफल हो गया था। उनके अनुसार, यह परीक्षण पूरी तरह से उत्तर कोरिया की मिसाइल क्षमताओं में सुधार लाने के उद्देश्य से भी किया जा सकता है। प्रोफेसर यांग ने यह भी कहा कि यूक्रेन में इस समय जो युद्ध चल रहा है, उसे देखते हुए उत्तर कोरिया संभवतः हwasong-11 मिसाइलों को और अधिक अपग्रेड करने की अपनी क्षमता का परीक्षण कर रहा होगा, क्योंकि इन मिसाइलों को विशेष रूप से सामरिक परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बनाने के लिए ही डिजाइन किया गया है।

दक्षिण कोरिया के JCS के अनुसार, दक्षिण कोरिया और अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने इस मिसाइल के लॉन्च के शुरुआती चरण से ही उस पर अपनी पैनी नजर बनाए रखी थी। दोनों देशों ने इस पूरी घटना की जानकारी जापान के साथ भी तुरंत साझा की और आपसी करीबी सहयोग के जरिए अपनी सैन्य तैयारियों को पूरी तरह से मजबूत बनाए रखा है। मजबूत संयुक्त रक्षा व्यवस्था के तहत दक्षिण कोरियाई सेना उत्तर कोरिया की हर एक गतिविधि पर लगातार पैनी नजर रख रही है और देश की सुरक्षा के लिए किसी भी संभावित उकसावे का मुंहतोड़ जवाब देने को पूरी तरह से तैयार है।

दक्षिण कोरिया के नेशनल सिक्योरिटी ऑफिस यानी NSO ने लगातार हो रहे इन मिसाइल परीक्षणों पर गहरी चिंता व्यक्त की है और प्योंगयांग से साफ शब्दों में यह मांग की है कि वह इस तरह की सभी उकसावे वाली कार्रवाइयों को तुरंत बंद करे, क्योंकि इन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का खुला उल्लंघन माना जाता है। बुधवार के इस मिसाइल लॉन्च के ठीक तुरंत बाद NSO ने देश के तमाम बड़े रक्षा और सैन्य अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन बैठक बुलाई। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान मिसाइल परीक्षण के सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों का बहुत बारीकी से आकलन किया गया और देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक सभी जरूरी कदमों पर गंभीर चर्चा की गई।

दूसरी तरफ, जापान के विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के शीर्ष विदेश नीति अधिकारियों ने इस मामले पर आपस में फोन पर लंबी बातचीत की है। इन तीनों देशों के बड़े अधिकारियों ने इस बात की एक बार फिर से पूरी पुष्टि की कि उत्तर कोरिया का यह बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च सीधे तौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों का स्पष्ट उल्लंघन है। इन तीनों देशों के अधिकारियों ने मिलकर प्योंगयांग से यह जोरदार अपील की है कि वह इस प्रकार की तमाम उकसावे वाली गतिविधियों को हमेशा के लिए बंद कर दे, क्योंकि यह सब पूरे क्षेत्र और पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की शांति एवं सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़ा खतरा पैदा करती हैं।

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