उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की न्यूक्लियर सबमरीन योजना पर दी चेतावनी, कहा- देंगे बेमिसाल जवाब

दक्षिण कोरिया की तरफ से न्यूक्लियर सबमरीन विकसित करने की बड़ी योजना का ऐलान करने के बाद से ही एशियाई राजनीति में पारा चढ़ गया है। इस योजना के सामने आने के बाद उत्तर कोरिया बुरी तरह भड़क गया है और उसने पड़ोसी देश को कड़ी चेतावनी दी है। प्योंगयांग सरकार ने साफ शब्दों में कह दिया है कि यदि दक्षिण कोरिया परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल करने की कोशिश करेगा, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और संभावित खतरों से निपटने के लिए अपनी तरफ से पूरी तैयारी रखेंगे।
दक्षिण कोरिया का 'जांग बोगो एन' कार्यक्रम और अमेरिका का साथ
दक्षिण कोरियाई सरकार ने बीते मई महीने में अपने महत्वाकांक्षी ‘जांग बोगो एन’ कार्यक्रम की घोषणा की थी। इस प्रोजेक्ट के तहत देश अपनी पहली परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी को विकसित करने और तैयार करने पर काम कर रहा है। सियोल प्रशासन का ऐसा मानना है कि यह कदम उत्तर कोरिया समेत पूरे इलाके में लगातार बढ़ रहे सैन्य खतरों का मुकाबला करने के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही इस योजना से देश की समुद्री रक्षा क्षमता भी मजबूत होगी। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका ने भी दक्षिण कोरिया को अपनी मंजूरी दे दी है। दोनों देशों के बीच पिछले साल अक्टूबर में नेताओं के बीच एक सुरक्षा समझौता हुआ था, जिसे अब जमीन पर उतारने के लिए शुरुआती बातचीत भी शुरू कर दी गई है। दक्षिण कोरिया की योजना के मुताबिक, देश की पहली न्यूक्लियर-पावर्ड सबमरीन को 2030 के दशक के मध्य तक लॉन्च किया जा सकता है और दशक के आखिर तक इसे पूरी तरह से ऑपरेशनल सेवा में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
उत्तर कोरिया का विदेश मंत्रालय और केसीएनए की रिपोर्ट
दक्षिण कोरिया की इस सरकारी समाचार एजेंसी योनहाप की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया की सरकारी एजेंसी केसीएनए (KCNA) में एक तीखी टिप्पणी प्रकाशित की गई है। इस टिप्पणी को उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के प्रथम उपमंत्री जांग कुम-चोल ने जारी किया है। उन्होंने दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच चल रहे परमाणु सहयोग पर तीखा हमला बोला है। जांग कुम-चोल ने आरोप लगाया कि सियोल सरकार लगातार परमाणु सामग्री के उत्पादन और परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उनका यह भी दावा है कि दक्षिण कोरिया का मुख्य लक्ष्य परमाणु ईंधन के पुनर्प्रसंस्करण यानी रीप्रोसेसिंग और यूरेनियम संवर्धन पर लगी सभी पाबंदियों से पूरी तरह आजाद होकर अपनी परमाणु सामग्री बनाने की ताकत हासिल करना है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा
उत्तर कोरियाई अधिकारी ने यह भी कहा कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया का यह आपसी परमाणु सहयोग कोरियाई प्रायद्वीप में शांति खत्म कर सकता है और अस्थिरता को बहुत ज्यादा बढ़ा सकता है। प्योंगयांग ने इसे साफ तौर पर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और समुद्री संप्रभुता के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती माना है। जांग कुम-चोल ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि उनका देश सभी मौजूदा और भविष्य के संभावित खतरों को पूरी तरह बेअसर करने की क्षमता रखता है। उन्होंने दो टूक कहा कि देश की रणनीतिक संप्रभुता और सुरक्षा को चुनौती देने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई का ऐसा कड़ा जवाब दिया जाएगा कि विरोधी दोबारा खड़े होने की स्थिति में ही न रहें। दक्षिण कोरिया की इस बड़ी पनडुब्बी परियोजना और उत्तर कोरिया के इस तरह के आक्रामक बयानों से आने वाले समय में कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य तनाव बढ़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है।