Norway Foreign Minister: नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे ने अमेरिका-ईरान संघर्ष को खत्म करने की उठाई मांग, कहा तेहरान में कट्टरपंथी ताकतें हो रही मजबूत।

नॉर्वे के विदेश मंत्री Espen Barth Eide ने 14 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान देते हुए अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे विवाद को तुरंत रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस सैन्य संघर्ष से कोई भी रणनीतिक लक्ष्य हासिल नहीं हुआ है, बल्कि इसके उलट तेहरान में कट्टरपंथी सोच रखने वाले लोगों को और अधिक मजबूती मिल रही है। यह जानकारी उन्होंने अल जजीरा इंग्लिश को दिए गए एक इंटरव्यू के दौरान साझा की। नॉर्वे ने इस पूरे मामले पर पहले भी खुलकर अपनी बात रखी है और ईरान के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाइयों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। नॉर्वे की सरकार का यह मानना है कि वैश्विक नियमों और कानूनों का पालन हर देश के लिए एक समान रूप से होना चाहिए ताकि दुनिया में शांति बनी रहे।
हार्मूज जलडमरूमध्य में नौवहन की आजादी पर जोर
विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे ने जोर देकर कहा कि सबसे पहले Strait of Hormuz में जहाजों के आने-जाने की आजादी को पूरी तरह से बहाल किया जाना बहुत जरूरी है। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि मौजूदा तनाव की वजह से समुद्री रास्ते पर खतरा मंडरा रहा है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हो रहा है। नॉर्वे के पास शांति वार्ताओं को कराने का एक लंबा अनुभव और विशेषज्ञता है, और देश ने इस जलमार्ग पर दोबारा समुद्री व्यवस्था को ठीक करने में मदद करने की अपनी इच्छा साफ तौर पर जाहिर की है। मध्य पूर्व के इस क्षेत्र में तनाव इस साल की शुरुआत यानी 28 फरवरी 2026 से लगातार बना हुआ है और यह दुनिया भर के देशों के लिए चिंता का एक बड़ा विषय बन चुका है।
पाकिस्तान का दौरा और कूटनीतिक प्रयास
ईडे का यह ताजा बयान उनके 13 अगस्त 2026 को समाप्त हुए पाकिस्तान के कूटनीतिक दौरे के तुरंत बाद सामने आया है। अपने उस दौरे के दौरान उन्होंने इस संघर्ष को सुलझाने में पाकिस्तान द्वारा निभाई गई सकारात्मक भूमिका की जमकर तारीफ की थी। इस बीच क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है क्योंकि हाल ही में ईरान के Khatam-al Anbiya सैन्य कमान के अधिकारियों ने अमेरिका के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें जलमार्ग पर नियंत्रण होने की बात कही गई थी। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने साफ कहा कि अमेरिकी रिपोर्टें पूरी तरह से झूठी और मनगढ़ंत हैं। इस पूरे घटनाक्रम के चलते खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें लगातार इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।