अमेरिका के नए प्रतिबंधों से लुढ़के तेल के दाम, ईरान पर कड़े एक्शन की तैयारी से बाजार में हलचल.

Nura Basta24 August 20263 min read68 viewsWorld
अमेरिका के नए प्रतिबंधों से लुढ़के तेल के दाम, ईरान पर कड़े एक्शन की तैयारी से बाजार में हलचल.

वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 24 अगस्त 2026 को भारी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका द्वारा ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने की आशंका के बीच बाजार में कारोबारियों ने सतर्क रुख अपनाया। Brent crude futures में एक प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई और यह $93.45 प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी तेल वायदा भाव भी एक प्रतिशत से अधिक फिसलकर $86.14 प्रति बैरल पर बंद हुआ। यह पूरी हलचल जनरल लाइसेंस एक्स यानी General License X (GL X) के 21 अगस्त 2026 को खत्म होने के बाद शुरू हुई, जिसके तहत पहले ईरान के कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के लेन-देन की अनुमति मिली हुई थी।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने सोमवार को दोपहर 2 p.m. EDT (1800 GMT) पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। इस दौरान व्हाइट हाउस के उस कड़े कदम का ब्यौरा दिया जाएगा जिसे इतिहास के सबसे सख्त प्रतिबंध कहा जा रहा है। देश के राष्ट्रपति Donald Trump ने इन नए उपायों को ईरान के लिए एक आर्थिक डी-डे करार दिया है। इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य ईरान के आर्थिक रास्तों को पूरी तरह से बंद करना है, ताकि दुनिया के इतिहास में सबसे बड़ा समन्वित आर्थिक अलगाव पैदा किया जा सके। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों को या तो वाशिंगटन का साथ देना होगा या फिर आर्थिक दंड भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। इसके साथ ही अमेरिकी सीनेट ने 1996 के ईरान प्रतिबंध अधिनियम को बढ़ाकर 2031 तक लागू रखने के लिए नया कानून आगे बढ़ाया है।

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ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया और खाड़ी देशों पर असर

ईरान ने अमेरिका के इन सभी कदमों को आर्थिक युद्ध करार दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने इस फैसले को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया। वहीं, विदेश मंत्री Abbas Araqchi ने कहा कि ये प्रतिबंध केवल अमेरिका की निराशा को दिखाते हैं और इनसे तेहरान झुकने वाला नहीं है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर यह आर्थिक दबाव ऐसे ही जारी रहा तो वह खाड़ी देशों से होने वाले अपने सभी तेल निर्यात को पूरी तरह से रोक देगा। दोनों देशों के बीच तनाव का मुख्य केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है, जहां ईरान ने वैश्विक तेल जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। ईरानी संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग ने एक नया कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके तहत अनुमति प्राप्त देशों के जहाजों को होर्मुज में ईरानी सेवाओं के लिए भुगतान करना होगा।

चीन ईरान के निर्यात होने वाले कुल तेल का 80% से अधिक हिस्सा खरीदता है और अमेरिका उसे इन नई नीतियों का पालन करने के लिए लगातार मना रहा है। इसके साथ ही संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE भी अपने स्तर पर व्यापार और वित्तीय प्रतिबंधों के नए चरण लागू करने की तैयारी में जुटा है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के प्रवक्ता सरदार मोहिबी और अन्य ईरानी अधिकारी इस पूरी स्थिति पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय यानी Office of Foreign Assets Control इन नए प्रतिबंधों को लागू करने की तैयारी पूरी कर चुका है।

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