अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध खत्म होने की संभावना वाले बयान के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी गई है। पहले जहां ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर के करीब पहुंच गया था, वहीं अब यह गिरकर 100 डॉलर के आसपास आ गया है। इस खबर से दुनिया भर के बाज़ारों और आम लोगों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद जगी है क्योंकि तेल की ऊंची कीमतों का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है।

कच्चे तेल की कीमतों में कितनी गिरावट आई?

बाज़ार में 9 मार्च 2026 को बड़ी हलचल देखी गई। ट्रंप के बयान के बाद कीमतें तेजी से नीचे की ओर आईं। इसका मुख्य कारण युद्ध के जल्दी खत्म होने की संभावना को माना जा रहा है।

  • Brent Crude: यह 119.50 डॉलर के शिखर से गिरकर लगभग 99 से 100 डॉलर के पास आ गया।
  • WTI Crude: यह भी 119 डॉलर के पार जाने के बाद अब 94 से 99 डॉलर के बीच बना हुआ है।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अभियान लगभग पूरा हो चुका है और यह समय से काफी आगे चल रहा है।
  • ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने भी संकेत दिया है कि कीमतों में यह उछाल केवल अस्थायी है और जल्द ही हालात सामान्य हो जाएंगे।

आम जनता और प्रवासियों पर क्या होगा असर?

तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और भारतीयों पर पड़ता है। अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दाम कम होते हैं, तो आने वाले समय में सामानों की ढुलाई और फ्लाइट टिकट के दामों में राहत मिल सकती है।

क्षेत्र वर्तमान स्थिति
Strait of Hormuz जहाजों की आवाजाही अभी रुकी हुई है, इसे खुलने में 2 हफ्ते लग सकते हैं।
G7 और IEA बाज़ार को स्थिर करने के लिए सुरक्षित तेल भंडार जारी करने पर चर्चा कर रहे हैं।
सऊदी अरब स्थानीय ईंधन की कीमतें फिलहाल 7 मार्च के ऊंचे स्तर पर ही बनी हुई हैं।
दक्षिण कोरिया उपभोक्ताओं को बचाने के लिए पेट्रोलियम उत्पादों पर प्राइस कैप लगा दिया गया है।

सऊदी विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर चेतावनी दी है कि ईरान को क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने से बचना चाहिए। फिलहाल बाज़ार की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि Strait of Hormuz कब तक पूरी तरह से खुलता है क्योंकि दुनिया का 20 प्रतिशत तेल यहीं से गुजरता है।