कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है और अब यह 93 डॉलर के नीचे चला गया है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह बदलाव देखा गया। कुछ समय पहले कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंच गई थीं, लेकिन अब हालात सुधरते दिख रहे हैं।

तेल की कीमतें क्यों गिर रही हैं?

अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को युद्धविराम का समझौता हुआ था, जिसके बाद Strait of Hormuz को फिर से खोल दिया गया। 15 अप्रैल को दोनों देशों के बीच फिर से बातचीत शुरू होने वाली है। इस खबर के बाद बाजार में उम्मीद जगी है और निवेशकों ने मुनाफा कमाना शुरू कर दिया, जिससे कीमतें नीचे गिरी हैं।

बड़े एक्सपर्ट्स ने क्या भविष्यवाणी की है?

विभिन्न संस्थाओं ने तेल की कीमतों को लेकर अलग-अलग अनुमान लगाए हैं। UBS का मानना है कि दिसंबर 2026 तक Brent तेल 90 डॉलर तक आ सकता है। वहीं Trading Economics के मुताबिक अगले एक साल में यह 111.07 डॉलर तक जा सकता है। TD Securities का कहना है कि कीमतें 90 से 100 डॉलर के बीच बनी रहेंगी।

तेल उत्पादन और बाजार का हाल

मार्च के महीने में OPEC+ देशों ने तेल उत्पादन में कटौती की थी। इस दौरान औसतन 35.06 मिलियन बैरल प्रतिदिन तेल का उत्पादन हुआ। युद्ध और तनाव की वजह से मध्य पूर्व के कई सदस्य देशों ने अपने उत्पादन को कम कर दिया था, जिसका असर वैश्विक सप्लाई पर पड़ा।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.