लाल सागर में बढ़ते तनाव और मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियों की खबरों के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी आई है। 29 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल के दाम 2 डॉलर प्रति बैरल से अधिक बढ़ गए, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत 101 डॉलर के पार पहुंच गई है। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी बढ़कर 93 डॉलर के करीब पहुंच गया है।
क्यों बढ़े तेल के दाम
यह उछाल अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा ईरान पर अमेरिकी बलों पर हमले का आरोप लगाने के बाद आया है, जिसके कारण 28 जुलाई को कच्चे तेल के वायदा भाव में लगभग 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। इसके अलावा, 29 जुलाई को हुथी विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला करने का दावा किया, हालांकि इन घटनाओं में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
बाजार पर असर
कुछ दिन पहले तक स्थिति सामान्य दिख रही थी और तेल की कीमतें कम हो रही थीं, लेकिन अब बदले हालात ने भविष्य में महंगाई के बने रहने की चिंता बढ़ा दी है। फरवरी 2026 में होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद से ही तेल बाजार अस्थिर बना हुआ है। हालांकि मौजूदा तनाव के बावजूद, यह बढ़ोतरी यूक्रेन युद्ध के दौरान हुए असर की तुलना में अभी सीमित है, लेकिन आम लोगों के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है।
