जुलाई के बाद तेल की कीमतें पहुंची सबसे ऊपर, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव से बढ़ गई मुसीबत.

Nura Basta18 August 20263 min read60 viewsWorld
जुलाई के बाद तेल की कीमतें पहुंची सबसे ऊपर, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव से बढ़ गई मुसीबत.

ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक से बड़ा उछाल देखने को मिला है। 18 अगस्त 2026 को तेल के दाम सीधे जुलाई महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी को कम करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें पूरी तरह से नाकाम होती नजर आ रही हैं, जिसका सीधा असर अब आम आदमी की जेब और ग्लोबल मार्केट पर पड़ रहा है।

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में बढ़ा तनाव और नाकाबंदी

जून महीने में एक 60-दिन का समझौता यानी एमओयू साइन हुआ था, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच शांति बहाल करना और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित करना था। लेकिन यह मियाद पूरी होने के बाद हालात और ज्यादा बिगड़ गए हैं। मंगलवार को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से गुजर रहे एक जहाज के इंजन रूम में जोरदार धमाका हुआ और अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हुए इस हमले में एक क्रू मेंबर भी घायल हो गया। ओमान की कोस्ट गार्ड टीम तुरंत मौके पर पहुंची और प्रभावित जहाज को जरूरी मदद मुहैया कराई।

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इससे एक दिन पहले यानी 17 अगस्त को रॉयटर्स से बातचीत में एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने साफ कर दिया था कि ईरान अब पूरी तरह से आक्रामक सैन्य रुख अपना रहा है। अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को तोड़ने के लिए सटीक और समय पर हमले करने की धमकी भी दी गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, इस नाकाबंदी की वजह से अब तक 64 कमर्शियल जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है, 3 जहाजों को बेकार कर दिया गया है और 2 जहाजों पर जबरन कब्जा किया गया है।

अमेरिका और ईरान का आमने-सामने का रुख

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने सोमवार को दो टूक कहा कि वह जून वाले समझौते की अवधि को आगे नहीं बढ़ाएंगे। उन्होंने दोहराया कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं हो सकता है और अमेरिकी नौसेना इस जलडमरूमध्य पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखेगी। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने ओमान को भी चेतावनी दी है कि यदि उसने शिपिंग चैनल को दोबारा खोलने के अमेरिकी प्रयासों में दखल दिया तो उसे सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। दूसरी तरफ, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने 60 दिन की किसी भी समयसीमा से इनकार किया और कहा कि परमाणु वार्ता कभी शुरू ही नहीं हुई थी। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के राजनीतिक उप प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल यादुल्लाह जवानी ने भी रक्षात्मक तेवर दिखाते हुए आक्रामक रुख अपनाने की बात कही है।

बाजार विशेषज्ञों की चिंता

इंटरएक्टिव ब्रोकर्स के जोस टोरेस ने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के बहम और बयानों के साथ-साथ दुश्मनी खत्म करने में नाकामी की वजह से क्रूड ऑयल के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं। केसीएम के मुख्य बाजार विश्लेषक टिम वाटरर ने कहा कि कतर, पाकिस्तान और तुर्किए की तरफ से बीच-बचाव की कोशिशें लगातार जारी हैं, लेकिन जहाजों की आवाजाही बहुत कम होने और किसी समझौते के दूर-दूर तक आसार न होने के कारण बाजार में अस्थिरता का यह माहौल अभी और लंबा खिंच सकता है।

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