26 जून 2026 को ओमान के पास एक कार्गो शिप पर हमले की खबर आने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 2% की बढ़ोतरी हुई है। इस घटना से समुद्र के रास्ते होने वाले व्यापार और सुरक्षा को लेकर एक बार फिर डर पैदा हो गया है। तेल की कीमतों में यह अचानक उछाल समुद्री सुरक्षा की घटना का सीधा नतीजा है।

United Kingdom Maritime Trade Operations (UKMTO) ने बताया कि ओमान के दाहित तट से करीब 7.5 समुद्री मील दूर एक कार्गो जहाज पर अज्ञात मिसाइल से हमला हुआ। इस हमले में जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुँचा है, लेकिन राहत की बात यह है कि किसी भी चालक दल के सदस्य को चोट नहीं आई और न ही समुद्र में कोई प्रदूषण फैला। यह हमला स्थानीय समय के अनुसार शाम 5:40 बजे हुआ।

अमेरिका के अधिकारियों ने इस हमले के लिए ईरान के Revolutionary Guard Corps (IRGC) को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि जहाज पर ईरानी ड्रोन से हमला किया गया था। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, हमला होने वाला जहाज सिंगापुर के झंडे वाला Ever Lovely था।

विवरण बदलाव/कीमत
Brent Crude की बढ़त $1.52 (2.1%)
Brent Crude की अंतिम कीमत $75.26 प्रति बैरल
WTI Crude की बढ़त $1.58 (2.3%)
WTI Crude की अंतिम कीमत $71.92 प्रति बैरल
कुल तेल बाजार वृद्धि लगभग 2%
घटना की तारीख 26 जून 2026
प्रभावित जहाज Ever Lovely (सिंगापुर)

इस घटना के बाद International Maritime Organization (IMO) के महासचिव Arsenio Dominguez ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की स्वैच्छिक निकासी योजना को अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा गारंटी की फिर से जांच की जाएगी।

वहीं, ईरान की Persian Gulf Strait Authority ने चेतावनी दी है कि जो जहाज उनके तय रास्तों से बाहर चलेंगे, उन्हें सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलेगी और किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी जहाज के मालिक और मास्टर की होगी। अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने ईरान के उस सुझाव को खारिज कर दिया है जिसमें जहाजों से पारगमन शुल्क (Transit Fee) लेने की बात कही गई थी। ओमान ने भी साफ किया है कि ईरान के साथ ट्रैफिक मैनेजमेंट के किसी भी सिस्टम में कोई फीस नहीं होगी।

अमेरिकी ऊर्जा सचिव Chris Wright ने पहले कहा था कि तेल का प्रवाह युद्ध से पहले के स्तर पर पहुँच रहा है, लेकिन बारूदी सुरंगों (mines) को हटाने में अभी कुछ हफ्ते लग सकते हैं। Rystad Energy के जानकारों का कहना है कि अगर जहाजों की आवाजाही जल्द ठीक नहीं हुई, तो तेल उत्पादकों को उत्पादन कम करना पड़ सकता है, जिससे क्षेत्रीय सुधार अगले साल तक टल सकता है।