दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि हॉर्मुज़ (Hormuz) जलडमरूमध्य के पास हालात फिलहाल शांत दिख रहे हैं, लेकिन बाजार में बेचैनी बनी हुई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और सप्लाई की दिक्कतों ने तेल के दाम बढ़ा दिए हैं।

कीमतों में उछाल और बाजार का हाल

29 जून 2026 को ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) और डब्ल्यूटीआई (WTI) दोनों के दामों में एक प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोत्तरी हुई। विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही सतह पर शांति दिख रही हो, लेकिन सप्लाई चेन अभी भी पूरी तरह ठीक नहीं हुई है। बाजार में कीमतों का विवरण नीचे दिया गया है:

विवरण आंकड़ा/कीमत
ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 73.15 अमेरिकी डॉलर
यूएस डब्ल्यूटीआई (WTI) 70.75 अमेरिकी डॉलर
ब्रेंट क्रूड में बढ़ोत्तरी 1 प्रतिशत से ज्यादा
डब्ल्यूटीआई में बढ़ोत्तरी 1 प्रतिशत से ज्यादा
EIA ब्रेंट अनुमान (मध्य 2026) 105 अमेरिकी डॉलर
मोर्गन स्टेनली Q3 अनुमान 90 अमेरिकी डॉलर
मोर्गन स्टेनली Q4 अनुमान 80 अमेरिकी डॉलर
IEA सप्लाई वृद्धि अनुमान 8 मिलियन बैरल प्रतिदिन

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की कोशिशें जारी हैं। 30 जून को दोहा, कतर में फिर से शांति वार्ता शुरू होनी है। 17 जून को एक अंतरिम समझौता हुआ था, जिसके तहत 60 दिनों के भीतर परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर चर्चा होनी है। लेकिन बीच-बीच में होने वाले हमलों ने बाजार को डरा रखा है और निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है।

सप्लाई और शिपिंग की चुनौतियां

  • ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम गरीबआबादी ने कहा कि उनका देश हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के ट्रैफिक पर नजर रखेगा।
  • फिलहाल 60 दिनों तक कोई ट्रांजिट फीस नहीं ली जाएगी, लेकिन उसके बाद फीस लगाने की बात कही गई है, जिसका अमेरिका और यूरोप विरोध कर रहे हैं।
  • केपलर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक, जहां पहले रोजाना करीब 125 टैंकर चलते थे, अब केवल 29 टैंकर ही दिख रहे हैं।
  • समुद्री रास्तों से बारूदी सुरंगों (mines) को हटाने में कई महीने लग सकते हैं, जिससे तेल की लागत बढ़ी रहेगी।

सऊदी अरब और अन्य अपडेट

सऊदी अरब की कंपनी अरमको (Aramco) ने 28 जून को अपने रास तनूरा टर्मिनल पर तेल लोडिंग फिर से शुरू कर दी है। यह काम करीब चार महीने तक बंद था। इसी दिन वहां एक हेलीकॉप्टर हादसे में 14 लोगों की जान भी चली गई। दूसरी ओर, ओपेक (OPEC) देशों ने बाजार की स्थिरता बनाए रखने के लिए उत्पादन में बदलाव किए हैं।