अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत की वजह से कच्चे तेल के दामों में बड़ा बदलाव देखा गया है। इस अनिश्चितता के कारण तेल की कीमतें अचानक बढ़कर 105 डॉलर के स्तर तक पहुंच गई हैं। दुनिया भर के बाजार अब इस बात का इंतज़ार कर रहे हैं कि इन दोनों देशों के बीच कोई ठोस समझौता होता है या तनाव और बढ़ेगा।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और बाजार का हाल
Akhbar24 Saudi की रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत 2 डॉलर से ज्यादा बढ़कर लगभग 105 डॉलर हो गई है। इसी तरह 22 मई 2026 को US West Texas Intermediate (WTI) कच्चे तेल के वायदा भाव 98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे। बाजार में इस समय इस बात को लेकर डर है कि अगर Strait of Hormuz बंद हुआ तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई पर बहुत बुरा असर पड़ेगा और कीमतें और बढ़ सकती हैं।
ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच क्या है विवाद
राष्ट्रपति Donald Trump ने 18 मई 2026 को बताया कि उन्होंने ईरान पर होने वाले सैन्य हमले को फिलहाल टाल दिया है। यह फैसला सऊदी अरब, UAE और कतर के नेताओं के अनुरोध पर लिया गया ताकि गंभीर बातचीत के जरिए समाधान निकाला जा सके। अमेरिका की सबसे बड़ी शर्त यह है कि ईरान के पास कोई परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए।
वहीं, Secretary of State Marco Rubio ने कहा है कि बातचीत में कुछ अच्छे संकेत मिले हैं। हालांकि, Strait of Hormuz में किसी भी तरह का टोल सिस्टम लागू करने की बात अमेरिका को मंजूर नहीं है। ईरान की तरफ से भी कहा गया है कि बातचीत में कुछ प्रगति हुई है लेकिन अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तेल की कीमत (Akhbar24) | लगभग 105 डॉलर |
| WTI कच्चे तेल का भाव | 98 डॉलर |
| मुख्य विवाद | यूरेनियम स्टॉकपाइल और Strait of Hormuz |
| सैन्य हमले पर फैसला | डोनाल्ड ट्रंप ने हमला टाला |
| मध्यस्थ देश | सऊदी अरब, UAE और कतर |
| अमेरिका की मुख्य शर्त | ईरान के पास परमाणु हथियार न हों |
| बातचीत की स्थिति | सीमित प्रगति |
Frequently Asked Questions (FAQs)
कच्चे तेल की कीमतें अचानक क्यों बढ़ गईं?
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति बातचीत में अनिश्चितता और Strait of Hormuz के बंद होने के डर की वजह से तेल की कीमतें बढ़कर 105 डॉलर तक पहुंच गईं।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमला क्यों नहीं किया?
सऊदी अरब, UAE और कतर के नेताओं ने अनुरोध किया था कि सैन्य हमले को टाला जाए ताकि दोनों देशों के बीच गंभीर बातचीत हो सके और शांति समझौता हो पाए।
