दुनिया भर के बाज़ारों में हड़कंप मच गया है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से तेल की कीमत 150 डॉलर के करीब पहुंच गई है। अमेरिकी नौसेना ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है, जिसका असर अब आम आदमी की जेब और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

तेल की कीमतों में इतना उछाल क्यों आया?

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने के लिए पाकिस्तान में हुई बातचीत नाकाम रही। इसके बाद अमेरिकी नौसेना ने सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी। इस तनाव की वजह से तेल के शिपमेंट की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। तेल बाज़ार के विशेषज्ञ मोहम्मद अल-शत्ती ने बताया कि बातचीत विफल होने और नाकेबंदी के ऐलान के बाद कीमतों में 7 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़त हुई है।

बाज़ार और शिपिंग पर क्या असर पड़ा?

तेल की कीमतों में आए इस उछाल और अमेरिकी एक्शन से दुनिया भर के शिपिंग रूट्स पर बड़ा असर पड़ा है। कई तेल टैंकरों ने रास्ता बदल लिया है और गैस की सप्लाई में भी भारी कमी आई है।

विवरण जानकारी
यूरोप के लिए स्पॉट ट्रांजेक्शन लगभग 150 डॉलर प्रति बैरल
जून डिलीवरी की कीमत 100 डॉलर से ऊपर
एशिया में LNG इम्पोर्ट 6 साल के सबसे निचले स्तर पर
अमेरिकी युद्धपोत 15 से ज़्यादा जहाज़ तैनात

अमेरिका और ईरान के बीच क्या विवाद है?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो भी ईरानी जहाज़ अमेरिकी नाकेबंदी के करीब आएंगे, उन्हें तुरंत खत्म कर दिया जाएगा। उन्होंने नौसेना को आदेश दिया है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में उन सभी जहाजों को रोका जाए जिन्होंने ईरान को टोल दिया है। दूसरी तरफ, ईरान ने इसे समुद्री डकैती बताया है और कहा है कि वह इस कार्रवाई का करारा जवाब देगा। यूएन की समुद्री एजेंसी और ब्रिटेन-फ्रांस जैसे देशों ने इस नाकेबंदी का विरोध किया है और रास्ता खोलने की मांग की है।