वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर बड़ी तेजी देखने को मिली है। सरकारी समाचार एजेंसी WAM के अनुसार, गुरुवार 11 जून 2026 को ट्रेडिंग के दौरान तेल की कीमतों में प्रति बैरल 2 डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस उछाल का सीधा असर आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की घरेलू कीमतों पर भी पड़ सकता है, जिससे आम जनता और खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों की जेब पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई?
गुरुवार को वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) दोनों में ही बड़ी बढ़त देखी गई। इससे पहले 9 जून को कीमतों में भारी गिरावट आई थी, लेकिन अब लगातार दूसरे दिन कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। तेल की कीमतों के आंकड़े इस प्रकार हैं।
| तेल का प्रकार | ताजा कीमत (प्रति बैरल) | बढ़ोतरी (डॉलर में) | बढ़ोतरी (प्रतिशत में) |
|---|---|---|---|
| ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) | $95.40 | $2.30 | 2.47% |
| डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) | $92.63 | $2.60 | 2.89% |
तेल की कीमतों में उछाल और यूएई पर इसका असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इसराइल संघर्ष के चलते तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के जरिए होने वाले तेल परिवहन में बाधा आ रही है। यूएई ने पहले ही जून 2026 के लिए पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है, जो अप्रैल और मई के बाद लगातार तीसरी बढ़ोतरी है। इसके अलावा यूएई ने अप्रैल 2026 में ओपेक (OPEC) से अलग होने का फैसला किया था ताकि वह अपनी घरेलू ऊर्जा नीतियों और तेल उत्पादन को अधिक लचीला बना सके। भारत और यूएई की ऊर्जा साझेदारी भी लगातार मजबूत हो रही है, जिसमें फुजैरा एनर्जी हब भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने में मदद कर रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेजी का प्रवासियों पर क्या असर होगा?
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से यूएई में पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे प्रवासियों का मासिक बजट और यातायात का खर्च बढ़ सकता है।
यूएई ने ओपेक (OPEC) छोड़ने का फैसला क्यों किया था?
यूएई ने घरेलू ऊर्जा उत्पादन में निवेश बढ़ाने और बाजार की अस्थिरता से निपटने के लिए अधिक लचीलापन हासिल करने के उद्देश्य से अप्रैल 2026 में ओपेक छोड़ने का फैसला किया था।
