लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हुए हमले के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। 23 जुलाई 2026 को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो बीते मई महीने के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी SPA ने हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि एक तेल टैंकर आग की चपेट में आ गया है।
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तेल की कीमतों पर वैश्विक असर
यमन के हूती विद्रोहियों ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है, जिसके बाद से तेल की सप्लाई को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। जानकारों का कहना है कि अगर सऊदी अरब के तेल निर्यात में इसी तरह की बाधा आती रही, तो आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर महंगाई फिर से बढ़ सकती है। Goldman Sachs ने अनुमान जताया है कि अगर ये स्थिति बनी रही, तो साल 2027 तक तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल को पार कर सकती है।
क्या है तेल बाजार की वर्तमान स्थिति
इस संकट के बीच तेल की सप्लाई को स्थिर करने के लिए OPEC+ सितंबर महीने के लिए उत्पादन में 188,000 बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी करने पर विचार कर रहा है। बाजार के विश्लेषकों का मानना है कि हूती विद्रोहियों की इस हरकत से समुद्री रास्तों में सुरक्षा का खतरा बढ़ गया है, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है।
| विवरण | वर्तमान स्थिति |
|---|---|
| ब्रेंट क्रूड मूल्य | $100.69 – $100.71 |
| दिनांक | 23-24 जुलाई 2026 |
| प्रमुख घटना | लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमला |
| OPEC+ निर्णय | 188,000 बैरल/दिन उत्पादन वृद्धि पर विचार |
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद हूती विद्रोहियों को सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब उनके नियंत्रण में है। फिलहाल, इस तनाव का असर आम आदमी की जेब पर महंगाई के रूप में पड़ सकता है।
