मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। 21 और 22 जुलाई 2026 को ब्रेंट क्रूड का दाम 91.51 डॉलर के स्तर तक पहुंच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 84.64 डॉलर तक गया। फिलहाल बाजार में अनिश्चितता का माहौल है और कीमतें 88.01 डॉलर के आसपास चल रही हैं।
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तनाव का असर और सप्लाई चेन
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसेना की नाकेबंदी फिर से लागू कर दी है, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं। ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई में बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का एलान किया है, जिसका सीधा असर तेल की सप्लाई पर पड़ रहा है।
बाजार विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में चल रहे विवाद के कारण तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। यदि यह तनाव ऐसे ही बना रहा, तो तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू सकती है। हालांकि OPEC+ ने अगस्त 2026 से उत्पादन में 548,000 बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी करने की घोषणा की है, लेकिन युद्ध के कारण बाजार में आपूर्ति की चिंता बनी हुई है।
| Oil Type | Recent High (USD) | Settlement (USD) |
|---|---|---|
| Brent Crude | 91.51 | 88.01 |
| WTI Crude | 84.64 | 82.29 |
अमेरिकी रक्षा मंत्री के अनुसार, ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियानों पर अब तक 37.5 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। फिलहाल एक 10-दिन के संघर्ष विराम का प्रस्ताव सामने आया है, जिससे स्थिति सामान्य होने की उम्मीद की जा रही है।
