भारतीय टेलीकॉम इंडस्ट्री में वह दौर सबसे मजेदार था जब टेलीकॉम इंडस्ट्री में एक नहीं दो नहीं तीन नहीं बल्कि लगभग दर्जन भर टेलीकॉम सेवा देने वाली कंपनियां बाजार में थी. सबके पैकेज एक के ऊपर एक थे और असल में अब लोगों के लिए कम पैसे में ज्यादा बेहतर सुविधाओं वाला दौर चालू हो रहा था.
हालांकि उसे समय टेलीकॉम इंडस्ट्री में लगने वाली लागत सामान्य टैरिफ को डाटा इस्तेमाल के लिए काफी महंगा रखी हुई थी. बाद में नियमों में हुए बदलाव ने डाटा टैरिफ को सस्ता तो कर दिया लेकिन बाकी टेलीकॉम कंपनियों का रास्ता पूरे तरीके से बंद कर दिया और बाजार में महज जियो और एयरटेल की बादशाहत रह गई बाकी सारे या तो पीछे छूट गए या वोडा आइडिया तथा बीएसएनएल के जैसे बस अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं रखें.
दोबारा से टेलीकॉम कंपनियों के लिए नए रास्ते खुल रहे हैं.
टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर में नए निवेश और नए सर्विस प्रोवाइडर को लाने के लिए नई टेलीकॉम एक्ट को लाइसेंस ऑथराइजेशन फ्रेमवर्क के तहत हरी झंडी दे दी गई है. जल्द ही बाजार में फिर से नई टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर नए टेलीकम्युनिकेशन एक्ट के तहत बाजार में दिखने चालू हो सकते हैं.

अगर सब कुछ ठीक रहा तो फिर से विदेशी कंपनियों के निवेश जैसे सिंगापुर टेलीकॉम (STEL) इत्यादि कंपनियां वापस भारतीय बाजार में शिरकत करेंगे और अपने टैरिफ तथा प्लान इत्यादि से लोगों को सेवा मुहैया करेंगे जो मौजूदा टेलीकॉम प्रोवाइड के मुकाबले सस्ता हो सकते हैं या कॉम्पिटेटिव हो सकते हैं.
भारत में 1 जनवरी 2025 से दूरसंचार क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहे हैं। नए राइट ऑफ वे (RoW) नियम लागू होने से टेलीकॉम कंपनियों को मोबाइल टावर और ऑप्टिकल फाइबर लाइन लगाने में आसानी होगी, जिससे 5G नेटवर्क के विस्तार में तेजी आएगी।
नए नियमों की मुख्य विशेषताएं:
- राइट ऑफ वे (RoW) नियम: इन नियमों के तहत, टेलीकॉम कंपनियों को मोबाइल टावर लगाने के लिए अब कई स्थानों से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी; केवल एक ही स्थान से अनुमति पर्याप्त होगी। इससे टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में तेजी आएगी।
- स्पेक्ट्रम आवंटन: सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम का आवंटन अब नीलामी के बजाय प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, जिससे इस क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
- उपयोगकर्ता सुरक्षा: फर्जी सिम कार्ड जारी करने पर रोक लगाने के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं। एक पहचान पत्र पर 9 से अधिक सिम कार्ड होने पर 50,000 रुपये का जुर्माना और दूसरी बार गलती करने पर 2 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या अपराधों की रोकथाम के लिए दूरसंचार सेवाओं का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का अधिकार होगा।