Oman और Iran के बीच अहम समझौता, स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में सुरक्षित नेविगेशन बहाल करने पर हुई बात.

ओमान और ईरान ने मिलकर एक बड़ा कदम उठाया है जिससे खाड़ी देशों में समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखने की कोशिश की जा रही है। 25 अगस्त 2026 को ओमान और ईरान ने एक संयुक्त बयान जारी किया जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से सुरक्षित नौवहन को फिर से शुरू करने के लिए उच्च स्तरीय चर्चा की घोषणा की गई। इस बात की जानकारी 'أخبار السعودية' (@SaudiNews50) आउटलेट के माध्यम से सामने आई है, जो दोनों देशों के बीच इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए चल रहे कूटनीतिक प्रयासों का हिस्सा है।
ओमान और ईरान के मंत्रियों के बीच हुई खास बैठक
इस पूरी बातचीत के दौरान ओमान के विदेश मंत्री सय्यद बद्र बिन हमद अल बुसादी और उनके ईरानी समकक्ष डॉ. सेयेद अब्बास अरागची आमने-सामने बैठे। इन बैठकों में दोनों अधिकारियों ने सुरक्षित नौवहन के लिए एक चरणबद्ध ढांचे को तैयार करने पर पूरा जोर दिया। इस योजना के तहत एक संयुक्त अस्थायी नेविगेशन कॉरिडोर बनाने और स्ट्रेट में बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए एक सहयोगात्मक परियोजना को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई गई।
आने वाले दिनों में तकनीकी प्रतिनिधिमंडल बातचीत को आगे बढ़ाएंगे ताकि एक स्थायी नेविगेशन कॉरिडोर को अंतिम रूप दिया जा सके। इसके अलावा जलमार्ग के भविष्य के प्रशासन को तय करने और ट्रैफिक मैनेजमेंट तथा सूचना साझा करने के लिए नए तंत्र स्थापित करने पर भी काम किया जाएगा, जिसमें दोनों देशों की संप्रभुता का पूरा सम्मान किया जाएगा।
पहले भी हो चुकी हैं कई अहम बैठकें
यह ताजा बातचीत पिछले कुछ महीनों में हुई प्रगति पर आधारित है। इससे पहले 18 जून 2026 को दोनों देशों के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके बाद 5 और 6 अगस्त 2026 को ईरान ने घोषणा की थी कि उसने सुरक्षित मार्ग के भौगोलिक कोऑर्डिनेट्स को लेकर ओमान के साथ एक समझौता कर लिया है।
चुनौतियां अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं
द्विपक्षीय स्तर पर भले ही काफी प्रगति हुई है, लेकिन ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने यह भी साफ किया कि कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। हालांकि उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि शिपिंग रूट के नक्शे पर सहमति बन गई है, लेकिन संयुक्त बयान की खास भाषा जैसे कुछ मुद्दे अभी अनसुलझे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश समुद्री यातायात की स्वतंत्रता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
इसके साथ ही उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर अमेरिका क्षेत्र में अपनी आक्रामक और धमकाने वाली कार्रवाइयां तथा बाधाएं डालना बंद नहीं करता है, तो केवल यह द्विपक्षीय समझौता पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता है। खाड़ी देशों में यात्रा करने वाले लोगों और वहां रहने वाले प्रवासियों के लिए इस मार्ग का सुरक्षित होना बहुत जरूरी है ताकि व्यापार और आवाजाही बिना किसी रुकावट के चलती रहे।