ओमान में यात्रा करने वाले यात्रियों और प्रवासियों के लिए एक जरूरी जानकारी सामने आई है. Civil Aviation Authority (CAA) ने फ्लाइट में होने वाली देरी और मुआवजे के नियमों को लेकर स्थिति साफ कर दी है. अब कुछ खास हालातों में एयरलाइंस यात्रियों को मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं होंगी, हालांकि यात्रियों की बुनियादी सुविधाओं का ख्याल रखना अभी भी एयरलाइंस की जिम्मेदारी होगी.

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किन वजहों से नहीं मिलेगा फ्लाइट मुआवजा?

ओमान CAA ने बताया कि ‘force majeure’ यानी ऐसी घटनाएं जो कंपनी के नियंत्रण से बाहर हों, उनमें मुआवजा नहीं दिया जाएगा. इन स्थितियों में निम्नलिखित कारण शामिल हैं:

  • ईंधन की सप्लाई में आने वाली दिक्कतें.
  • सुरक्षा संबंधी मुद्दे जैसे युद्ध, संघर्ष या कोई गैरकानूनी हरकत.
  • एयरपोर्ट या हवाई क्षेत्र (airspace) का बंद होना.
  • खराब मौसम और प्राकृतिक आपदाएं जिससे सुरक्षा को खतरा हो.
  • बर्ड स्ट्राइक यानी विमान से पक्षियों का टकराना.
  • हवाई सेवाओं को प्रभावित करने वाली औद्योगिक हड़ताल.
  • ऐसी तकनीकी खराबी या मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट जिस पर एयरलाइन का सीधा नियंत्रण न हो.

मुआवजा नहीं मिलने पर यात्रियों को क्या सुविधाएं मिलेंगी?

भले ही ऊपर बताई गई स्थितियों में पैसा न मिले, लेकिन Passenger Rights Protection Regulation के तहत एयरलाइंस को यात्रियों की देखभाल करनी होगी. इसमें ये सुविधाएं शामिल हैं:

  • यात्रा में देरी होने पर रिफ्रेशमेंट और भोजन देना.
  • जरूरत पड़ने पर ठहरने के लिए होटल या आवास की व्यवस्था करना.
  • फ्लाइट रीबुकिंग (rebooking) के विकल्प देना ताकि यात्री अपनी मंजिल तक पहुँच सकें.

CAA का कहना है कि यह नियम यात्रियों के अधिकारों और एयरलाइंस की ऑपरेशनल जरूरतों के बीच संतुलन बनाने के लिए बनाया गया है. प्रवासियों और अक्सर यात्रा करने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फ्लाइट बुक करने से पहले इन नियमों को अच्छी तरह समझ लें.

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या खराब मौसम की वजह से फ्लाइट लेट होने पर पैसा मिलेगा?

नहीं, ओमान CAA के मुताबिक खराब मौसम ‘force majeure’ की श्रेणी में आता है, इसलिए एयरलाइंस मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं हैं, लेकिन वे आपको खाना और होटल जैसी सुविधाएं देंगी.

Force Majeure का मतलब क्या होता है?

इसका मतलब ऐसी अप्रत्याशित घटनाएं हैं जो किसी के नियंत्रण में नहीं होतीं, जैसे प्राकृतिक आपदाएं, सुरक्षा खतरे या हवाई क्षेत्र का अचानक बंद होना.

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.