Oman के पास कार्गो जहाज पर हुआ हमला, होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा.

ओमान के पास एक कार्गो जहाज पर हुए ताजा हमले ने मध्य पूर्व के समुद्री इलाकों में हलचल बढ़ा दी है। इस घटना से दुनिया भर के देशों की चिंता फिर से बढ़ गई है क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में इस साल 28 फरवरी से लगातार तनाव का माहौल बना हुआ है, जिससे व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इस बीच ओमान सरकार और ईरान के बीच इस संवेदनशील जलमार्ग को लेकर कूटनीतिक बातचीत भी चल रही है, लेकिन नए हमलों ने हालात को और अधिक जटिल बना दिया है।
ओमान के पास कार्गो जहाज पर अज्ञात चीज से हमला
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स यानी UKMTO ऑपरेशन्स सेंटर ने अपने एक्स हैंडल पर ओमान के पास एक कार्गो जहाज पर हमले की सूचना दी है। यह हमला ओमान के खसाब से 20 नॉटिकल मील यानी करीब 37 किलोमीटर उत्तर-पूर्व की दिशा में हुआ है। जहाज पर किसी अज्ञात चीज यानी प्रोजेक्टाइल से हमला किया गया है, जिसके बाद संबंधित अधिकारी इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। यूकेएमटीओ सेंटर ने उस इलाके से गुजरने वाले सभी जहाजों को पूरी सावधानी बरतने और किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत सूचना देने की सलाह दी है।
ओमान और ईरान के बीच बातचीत जारी
एक तरफ जहां हमलों का दौर जारी है, वहीं ईरान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उसकी ओमान के साथ बातचीत में प्रगति हो रही है। हालांकि ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में फिर से शांति स्थापित हो सके, इसके लिए कतर और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रीय मध्यस्थ पर्दे के पीछे लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय की तरफ से सोमवार को यह घोषणा की गई कि ओमान के साथ हो रही यह बातचीत जहाजों के आने-जाने के लिए एक अस्थायी रास्ता तैयार करने पर पूरी तरह केंद्रित है।
अगर यह बातचीत सफल साबित होती है तो इस प्रमुख जलमार्ग में ईरानी और ओमानी दोनों रास्तों को आपस में मिला दिया जाएगा। मध्यस्थ देशों का मानना है कि यह कदम ईरान और अमेरिका के बीच आपसी विश्वास को बढ़ाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और पहला सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।
अमेरिका और ईरान की तीखी प्रतिक्रियाएं
इस राजनयिक हलचल के बीच ईरान ने दो टूक शब्दों में कहा है कि उसे अमेरिकी धमकियों से कोई फर्क नहीं पड़ता है और देश की सैन्य प्रतिरोधक क्षमता पूरी तरह से मजबूत है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने साफ कर दिया है कि वह देश पर आने वाले किसी भी खतरे का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हर समय तैयार बैठा है। दूसरी तरफ अमेरिकी मध्य कमान यानी CENTCOM ने बयान जारी कर कहा है कि अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में आने-जाने वाले सभी कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पुष्टि की कि ईरान पर अमेरिका एक बड़े हमले की योजना बना चुका था, लेकिन खाड़ी देशों के विशेष आग्रह पर उन्होंने खुद संयम बरतना बेहतर समझा और फिलहाल हमले के फैसले को स्थगित कर दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अगर यह हमला होता तो ईरान के भीतर हजारों बेकसूर लोगों की जान चली जाती। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब अपनी शर्तें मानना पूरी तरह से ईरानी सरकार के ऊपर निर्भर करता है और यह ईरान के लिए आखिरी मौका है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम बंद नहीं करता और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपने रुख में बदलाव नहीं लाता है, तो उसे इसके बहुत गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।