Oman Government Statement: ओमान ने दिया बड़ा बयान, खाड़ी देशों पर हमले के खिलाफ दिखाया कड़ा रुख
ओमान सरकार ने खाड़ी और अन्य अरब देशों के समर्थन में एक बड़ा बयान जारी किया है। 9 मार्च 2026 को सऊदी न्यूज़ के हवाले से बताया गया कि ओमान अपने पड़ोसी देशों की ज़मीन और उनके बुनियादी ढांचे पर हो रहे किसी भी हमले के खिलाफ मजबूती से खड़ा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान द्वारा कई अरब देशों के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया है। ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र अलबुसैदी ने अरब लीग की एक विशेष बैठक में यह बात स्पष्ट की है।
📰: चीन ने खाड़ी देशों की सुरक्षा पर दिया बड़ा बयान, कहा गल्फ देशों की संप्रभुता से कोई समझौता नहीं।
क्या है ओमान का बयान और यह फैसला क्यों लिया गया?
हाल के दिनों में सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और जॉर्डन जैसे देशों के सिविल एयरपोर्ट और एनर्जी प्लांट पर हमले देखे गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान के दुक्म पोर्ट (Port of Duqm) पर भी हमला हुआ था। इसके बाद ओमान ने अपनी पुरानी नीति को बदलते हुए खुलकर अपने पड़ोसी देशों का साथ देने का फैसला किया है। अरब लीग ने भी इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन मानते हुए Resolution No. 9241 पास किया। ओमान के विदेश मंत्री ने कहा कि पूरे इलाके में अब ताकत की जगह बातचीत से मामला सुलझाना चाहिए।
अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर क्या असर पड़ रहा है?
खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और आम लोगों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इस तनाव का सीधा असर बाजार और वहां रहने वाले लोगों पर पड़ सकता है। इन घटनाओं के बाद कुछ बड़े बदलाव देखे गए हैं:
- सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने की कीमतों में 1 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के डर से कच्चे तेल के बाजार में भारी उतार-चढ़ाव आ गया है।
- सऊदी की एक प्रमुख रिफाइनरी में आग लगने की घटनाओं से भी ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ है।
- खाड़ी क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों का बीमा काफी महंगा हो गया है, जिससे आने वाले समय में सामानों की सप्लाई पर असर पड़ सकता है।
खाड़ी देशों की आगे की क्या रणनीति है?
ओमान के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर यह स्थिति बनी रही तो समुद्री व्यापार और पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हो सकता है। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और अरब लीग ने इस मसले पर आपातकालीन बैठकें की हैं। सभी देश मिलकर एक सुरक्षित रणनीति बनाने पर काम कर रहे हैं ताकि आम लोगों और बुनियादी ढांचे को कोई और नुकसान ना पहुंचे।





