ओमान के विदेश मंत्रालय ने अरब खाड़ी में जहाजों की आवाजाही को लेकर बड़ी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि समुद्र में जहाजों के आने-जाने का रास्ता सुरक्षित रहे, इसके लिए अब ठोस और व्यावहारिक समाधान निकालने का समय आ गया है। यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव की वजह से कई जहाज बीच समुद्र में फंसे हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका असर पड़ रहा है।
ओमान और GCC देशों का इस मामले पर क्या कहना है?
ओमान के विदेश मंत्री Sayyid Badr bin Hamad Al Busaidi ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्र के नियमों (UNCLOS) का पालन करने की बात कही है। उनका कहना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए बातचीत और आपसी सहयोग जरूरी है। ओमान ने अपनी तटस्थ नीति और संवाद के जरिए मसले हल करने पर जोर दिया है।
- GCC का रुख: GCC महासचिव Jasem Mohamed Albudaiwi ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कोशिशों का समर्थन किया जाता है।
- शर्तें: महासचिव ने यह भी कहा कि ईरान के साथ किसी भी समाधान में उसके परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल और प्रॉक्सी गतिविधियों को रोकना जरूरी होगा।
- राजनयिक प्रयास: मिस्र और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने भी ओमान के साथ बातचीत की और अमेरिका व ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया।
समुद्र में जहाजों की क्या स्थिति है और कौन कर रहा है मदद?
फरवरी 2026 से शुरू हुए सैन्य टकराव के कारण समुद्र में हालात खराब हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक 1 मार्च 2026 तक कम से कम 150 तेल और गैस टैंकर खाड़ी के खुले पानी में फंसे हुए थे। 25 अप्रैल को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने Epaminondas नाम के एक जहाज को पकड़ा, जबकि अमेरिकी कमांड ने भी एक जहाज को रोका।
इस संकट के बीच सऊदी अरब ने फंसे हुए जहाजों की मदद के लिए कदम उठाए हैं। सऊदी अरब ने अपने टगबोट्स भेजे हैं और एक 24 घंटे काम करने वाला कोस्टल ऑपरेशंस सेंटर बनाया है ताकि मुश्किल में फंसे नाविकों और जहाजों को तुरंत राहत मिल सके।