ओमान की खाड़ी में एक बड़ा हादसा हुआ है जहाँ एक अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई. इस घटना में विशाखापट्टनम के रहने वाले पटनाला सुरेश भी मारे गए. अब उनकी यूनियन ने सरकार से उनके परिवार के लिए 10 करोड़ रुपये के मुआवजे की माँग की है.
क्या था पूरा मामला
यह घटना 10 जून 2026 को हुई जब Palau देश के झंडे वाले तेल टैंकर MT Settebello पर हमला किया गया. यह जहाज ओमान के सोहार से करीब 20 समुद्री मील दूर था. बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने जहाज के इंजन रूम पर सटीक हमला किया. अमेरिका का दावा था कि जहाज ने नौसैनिक नाकाबंदी का उल्लंघन किया और रेडियो आदेशों को नहीं माना, क्योंकि उस पर प्रतिबंधित ईरानी तेल ले जाने का शक था.
इन भारतीय नाविकों की हुई मौत
जहाज पर कुल 28 लोग थे जिनमें 24 भारतीय थे. इस हमले में मुख्य इंजीनियर पटनाला सुरेश (विशाखापट्टनम), डेक कैडेट आदित्य शर्मा और फिटर शिवानंद चौरसिया की मौत हो गई. इसके अलावा, 11 जून को MT Celestial जहाज पर सवार एक अन्य भारतीय अधिकारी निशान्त उइरतानाथन की भी मौत हो गई, क्योंकि उन्हें समय पर मेडिकल मदद नहीं मिल पाई.
यूनियन और सरकार का रुख
Forward Seamen’s Union of India (FSUI) के नेता पद्मनाभा राजू ने इस घटना की कड़ी निंदा की. उन्होंने केंद्र और आंध्र प्रदेश सरकार पर कार्रवाई में देरी का आरोप लगाया. FSUI ने मांग की है कि अमेरिकी सरकार चारों मृत नाविकों के परिवारों को 5 मिलियन डॉलर (करीब 47 करोड़ रुपये से ज्यादा) का मुआवजा दे. भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 12 जून 2026 को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात कर इस हमले पर कड़ा विरोध जताया.
बीमा और सुरक्षा की मांग
पटनाला सुरेश के परिवार को मुआवजे के लिए P&I इंश्योरेंस की जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है. कानूनी सलाहकारों ने परिवार को मूल क्रू एग्रीमेंट और Palau देश से डेथ सर्टिफिकेट लेने की सलाह दी है. साथ ही, FSUI ने सरकार से मांग की है कि हाई रिस्क इलाकों में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना का सुरक्षा घेरा मजबूत किया जाए और संकट प्रबंधन के लिए एक स्थायी सिस्टम बनाया जाए.
शांति समझौते का स्वागत
इस तनाव के बीच FSUI ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य के फिर से खुलने का स्वागत किया है. यूनियन का मानना है कि इससे समुद्र में काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा बढ़ेगी.