Strait of Hormuz के जरिए जहाजों की आवाजाही को लेकर ओमान ने एक बड़ा ऐलान किया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि भविष्य में इस समुद्री रास्ते के मैनेजमेंट के लिए कोई ट्रांजिट फीस नहीं ली जाएगी। ओमान चाहता है कि इस महत्वपूर्ण इलाके में जहाजों का आना-जाना पूरी तरह फ्री और सुरक्षित रहे।

ओमान के विदेश मंत्री Badr Al-Busaidi ने 25 जून 2026 को बहरीन में GCC और अमेरिका के बीच हुई एक मीटिंग में यह बात कही। उन्होंने साफ किया कि भविष्य में जो भी मैनेजमेंट सिस्टम बनेगा, उसमें जहाजों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इससे पहले 22 जून को मस्कट में ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत के दौरान भी उन्होंने ‘टोल-फ्री’ सुरक्षित रास्ते की बात दोहराई थी।

16 जून 2026 को ईरान और ओमान दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई थी कि समुद्री नेविगेशन पूरी तरह सुरक्षित और फ्री रहेगा। यह फैसला अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते (MOU) के बाद आया। ओमान का यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून (UNCLOS) के हिसाब से है, जो जहाजों को बिना किसी रुकावट के रास्ता देने की बात करता है।

सुरक्षा कारणों से ओमान ने International Maritime Organization (IMO) के साथ मिलकर 24 जून 2026 को एक अस्थायी समुद्री रास्ता (Temporary Transit Corridor) शुरू किया है। इस रास्ते पर भी कोई टोल या पाबंदी नहीं होगी। ओमान ने बताया कि पुराने शिपिंग रास्ते अब सुरक्षित नहीं रहे हैं। नए अस्थायी रास्ते इसलिए बनाए गए ताकि अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे टकराव की वजह से फंसे करीब 11,000 नाविकों को सुरक्षित निकाला जा सके।

इस पूरे मामले पर अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भी अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz में जहाजों पर टोल लगाना अमेरिका के लिए एक ‘रेड लाइन’ होगी और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शुरुआती 60 दिनों के समझौते में भी ट्रांजिट चार्ज न लेने की बात कही गई है।

हालांकि कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि ईरान सर्विस चार्ज लेने पर विचार कर रहा था, लेकिन बाद में राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने अमेरिका को सूचित किया है कि कोई टोल या शुल्क नहीं मांगा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई भी देश यहाँ टोल वसूलता है, तो यह समुद्री कानूनों का उल्लंघन होगा।

फिलहाल ओमान और ईरान के विदेश मंत्रालयों ने एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप बनाया है। यह ग्रुप भविष्य में नेविगेशन के मैनेजमेंट और दी जाने वाली सुविधाओं के खर्चों पर बातचीत जारी रखेगा, ताकि सब कुछ अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से हो सके।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com