ओमान ने ईरान द्वारा शांति और बातचीत के रास्ते को अपनाने की तारीफ की है। ओमान का मानना है कि ईरान ने युद्ध रोकने और कूटनीतिक प्रक्रिया में शामिल होकर एक जिम्मेदार तरीका अपनाया है। यह खबर उस समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और सीजफायर को बनाए रखने की कोशिशें चल रही हैं।

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सीजफायर और बातचीत का क्या मामला है?

अमेरिका और ईरान के बीच 7 अप्रैल 2026 को दो हफ्ते का सीजफायर तय हुआ था, जिसमें पाकिस्तान ने मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाई। 10 और 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई, लेकिन कोई अंतिम समझौता नहीं हो पाया। ओमान के विदेश मंत्री सैयद बदर अल बुसादी ने इस सीजफायर को आगे बढ़ाने की मांग की है ताकि शांति बनी रहे।

किन देशों ने क्या भूमिका निभाई?

इस पूरे मामले में कई देशों ने अपनी भूमिका निभाई है, जिसकी जानकारी नीचे दी गई तालिका में है:

देश/व्यक्ति भूमिका और प्रस्ताव
ओमान मध्यस्थ की भूमिका निभाई और कूटनीति का समर्थन किया।
ईरान सीजफायर माना और शांति के लिए 10 सूत्रीय योजना पेश की।
अमेरिका सीजफायर पर सहमति जताई और 15 सूत्रीय प्रस्ताव रखा।
पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ रहा और इस्लामाबाद में बातचीत की मेजबानी की।
तुर्किये और मिस्र सीजफायर समझौते को करवाने में मदद की।
ईरान विदेश मंत्री होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रास्ता देने की बात कही।

अब आगे क्या होने वाला है?

यह सीजफायर 21 अप्रैल को खत्म होने वाला है। अभी भी मध्यस्थ दोनों देशों के बीच के मतभेदों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। ओमान का कहना है कि स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों को कुछ मुश्किल समझौते करने पड़ सकते हैं। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर हैं कि क्या 21 तारीख से पहले कोई नया समझौता हो पाता है या नहीं।