Oman और Iran के बीच बड़ी मीटिंग, Strait of Hormuz में जहाजों के लिए बनेगा नया रास्ता, व्यापार पर होगा सीधा असर.
ओमान और ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्री जहाजों की आवाजाही को फिर से सामान्य बनाने के लिए हाथ मिलाया है। 4 अप्रैल को हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों के विशेषज्ञों ने व्यापार को सुरक्षित रखने के लिए नए विकल्पों पर विस्तार से चर्चा की। इस कदम से खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और वहां से व्यापार करने वाली कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है क्योंकि यह रास्ता दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद जरूरी है।
मीटिंग में किन खास बातों पर हुई चर्चा?
यह महत्वपूर्ण बैठक उप विदेश मंत्री स्तर पर आयोजित की गई थी जिसमें समुद्री यातायात को सुचारू बनाने के लिए कई सुझाव पेश किए गए। विशेषज्ञों ने अपनी राय रखते हुए कहा कि क्षेत्रीय संघर्ष के बीच जहाजों का सुरक्षित निकलना सबसे बड़ी चुनौती है। बैठक में कुछ मुख्य फैसले और बातें सामने आई हैं:
- ईरान एक नए शांति प्रोटोकॉल (peacetime protocol) का मसौदा तैयार कर रहा है ताकि समुद्री यातायात की निगरानी की जा सके।
- ओमान और ईरान मिलकर एक संयुक्त सुरक्षा तंत्र बनाने पर विचार कर रहे हैं।
- इसका मकसद समुद्री व्यापार को सुगम बनाना है न कि किसी तरह की पाबंदी लगाना।
- ओमान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि बातचीत का दौर आगे भी जारी रहेगा।
- ईरान के मुताबिक होर्मुज के रास्ते का फैसला केवल ओमान और ईरान को ही मिलकर करना चाहिए।
समुद्री यातायात के ताजा आंकड़े और मौजूदा स्थिति
क्षेत्र में चल रहे तनाव के कारण होर्मुज के रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी कमी देखी गई है। हालांकि पिछले 24 घंटों में कुछ सुधार दर्ज किया गया है। नीचे दी गई तालिका में हालिया गतिविधि को समझा जा सकता है:
| तारीख | जहाजों की संख्या | विवरण |
|---|---|---|
| 4 अप्रैल 2026 | – | ओमान और ईरान के बीच आधिकारिक मीटिंग हुई |
| 5 अप्रैल 2026 | 20 जहाज | 14 जहाज बाहर गए और 6 जहाज अंदर आए |
| 5 अप्रैल (शाम तक) | 15 जहाज | ईरान की समाचार एजेंसी के अनुसार पार हुए |
| ऐतिहासिक औसत | बहुत अधिक | मौजूदा आंकड़े पुराने औसत से काफी कम हैं |
भारतीय प्रवासियों और व्यापारियों के लिए यह खबर काफी अहम है क्योंकि Strait of Hormuz से ही भारत को होने वाली तेल की सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर यहां यातायात सामान्य होता है, तो इससे तेल की कीमतों और सामानों की आवाजाही पर सकारात्मक असर पड़ेगा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी अगले हफ्ते इस मुद्दे पर एक प्रस्ताव ला सकती है ताकि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत सुरक्षा को और पुख्ता किया जा सके।




