ओमान और ईरान ने एक बार फिर हाथ मिलाया है। दोनों देशों ने तय किया है कि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में जहाजों के आने-जाने के नियमों पर अपनी तकनीकी और राजनीतिक बातचीत जारी रखेंगे। यह फैसला मस्कट में हुई एक बड़ी मीटिंग के बाद लिया गया है।

ओमान की सरकारी समाचार एजेंसी ने 11 जुलाई 2026 को इस समझौते की जानकारी दी। मस्कट में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) और ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी (Badr al-Busaidi) के बीच हाई-लेवल बातचीत हुई। इस मुलाकात का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा बनी रहे और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन हो।

दोनों देशों ने क्षेत्रीय हालातों को देखते हुए समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आजादी पर चर्चा की। बातचीत के दौरान पाकिस्तान की मदद से तैयार किए गए ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) के क्लॉज 5 का जिक्र किया गया, ताकि सुरक्षित रास्ता निकालने का तरीका तय किया जा सके।

जहाँ ओमान का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और UNCLOS के मुताबिक सभी को इस समुद्री रास्ते से गुजरने का हक है, वहीं ईरान का नजरिया अलग है। ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत आमिर सईद इरावानी (Amir Saeid Iravani) ने 11 जुलाई को कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का मैनेजमेंट पूरी तरह ईरान के पास है और इसमें किसी भी बाहरी दखल की जरूरत नहीं है।

यह सारी डिप्लोमेटिक कोशिशें ऐसे समय में हो रही हैं जब अमेरिका लगातार ईरान पर दबाव बना रहा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान दुनिया के सामने यह ऐलान करे कि सभी शिपिंग रास्ते खुले हैं और वहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को कोई खतरा नहीं है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.