ओमान और ईरान के बीच मस्कट में एक बहुत अहम बैठक हुई। ओमान के विदेश मंत्री Badr Al-Busaidi और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने Strait of Hormuz की सुरक्षा और वहां जहाजों की आवाजाही पर विस्तार से बात की। इस मीटिंग में फंसे हुए नाविकों को छुड़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता लाने जैसे जरूरी मुद्दों पर चर्चा हुई ताकि व्यापार और सुरक्षा बनी रहे।

बैठक में किन मुख्य मुद्दों पर बात हुई?

इस बैठक में ओमान के सुल्तान Haitham bin Tariq Al Said भी शामिल थे। चर्चा के दौरान मुख्य रूप से इन बातों पर जोर दिया गया:

  • जहाजों की सुरक्षा: Strait of Hormuz, Persian Gulf और Sea of Oman में जहाजों के आने-जाने की सुरक्षा पर बातचीत हुई।
  • नाविकों की रिहाई: ओमान के विदेश मंत्री ने कहा कि मानवीय आधार पर फंसे हुए नाविकों को जल्द से जल्द छुड़ाना जरूरी है।
  • राजनयिक समाधान: Badr Al-Busaidi ने जोर दिया कि बातचीत और व्यावहारिक समाधानों से ही समुद्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सकती है।
  • स्थिरता: ओमान के सुल्तान ने कहा कि उनका देश क्षेत्र में चल रहे विवाद को खत्म करने और शांति बहाल करने में मदद के लिए तैयार है।

ईरान की क्या मांग है और क्या हुआ ताजा एक्शन?

ईरान ने इस बैठक और अपने बयानों के जरिए कुछ बड़ी बातें साफ की हैं। ईरान चाहता है कि Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूला जाए और इसके लिए वह ओमान का समर्थन मांग रहा है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि मध्य पूर्व में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी की वजह से असुरक्षा बढ़ती है और क्षेत्र को बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त रखना चाहिए।

तनाव के बीच 26 अप्रैल 2026 को ईरान ने दो इजरायली कंटेनर जहाजों, MSC FRANCESCA और EPAMINONDAS को जब्त कर लिया। ईरान ने इसे अमेरिका द्वारा अपने तेल टैंकरों को जब्त करने का जवाब बताया। वहीं, ईरान के जनरल Mohammad Jafar Asadi ने साफ किया कि वह किसी भी बाहरी ताकत को इस जलमार्ग पर अपनी शर्तें थोपने की इजाजत नहीं देगा क्योंकि यह इलाका ईरान और उसके पड़ोसी देशों का है।

अन्य देशों की क्या भूमिका रही?

इस पूरे विवाद में पाकिस्तान एक मध्यस्थ की तरह काम कर रहा है ताकि ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम की बातचीत फिर से शुरू हो सके। ईरान के विदेश मंत्री ने ओमान की यात्रा के बाद इस्लामाबाद में पाकिस्तानी अधिकारियों से मुलाकात की और उसके बाद वह रूस के लिए रवाना हुए। इसके अलावा, 26 अप्रैल को ही विदेश मंत्री Araghchi ने कतर और सऊदी अरब के अपने समकक्षों से फोन पर बातचीत की ताकि क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाया जा सके।